नियुक्ति विभाग ने शशांक शेखर सिंह के खिलाफ जांच शुरू की

नियुक्ति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा पूर्व कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह के सेवा अभिलेख सम्बंधित मामले में की गयी शिकायत को संज्ञान में लेते हुए नागरिक उड्डयन विभाग को अग्रेतर कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं. शिकायत में ठाकुर ने शशांक शेखर सिंह की जन्मतिथि, शैक्षिक योग्यताओं, तकनीकी योग्यताओं तथा उनकी प्रथम नियुक्ति से अंत तक की चरित्र पंजिका जैसी कई जानकारियों के सम्बन्ध में कोई शासकीय अभिलेख नहीं होने के बावजूद पूरी नौकरी करने की जांच कराने की मांग की थी.

सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत देवेन्द्र कुमार दीक्षित द्वारा सिंह से सम्बंधित कई जानकारियाँ मांगी गयी थी. इस सम्बन्ध में नागरिक उड्डयन निदेशालय के पत्र दिनांक 17 मई 2012 द्वारा बताया गया कि इनमें से कोई भी सूचना निदेशालय में उपलब्ध नहीं है. नियुक्ति विभाग भी कोई सूचना उपलब्ध नहीं करा सका. इसके अलावा 19 अप्रैल 1990 का एक शासकीय अभिलेख सामने आया जिसमे लिखा है- “कैप्टन शशांक शेखर सिंह से अभी तक उनका बायोडाटा तथा चरित्र पंजिका प्राप्त नहीं हुई है. श्री सिंह को अनुस्मारक करने के लिए आलेख सचिव महोदया के अनुमोदनार्थ प्रस्तुत है” जिस पर तत्कालीन नियुक्ति सचिव नीरा यादव का नोट दिनांक 20 अप्रैल 1990 अंकित है- “मैंने श्री सिंह से पुनः व्यक्तिगत रूप से अनुरोध कर उनको रिमाइन्ड करा दिया है.”

शशांक शेखर सिंह के सम्बन्ध में कोई शासकीय अभिलेख नहीं उपलब्ध होने के आधार पर नूतन ठाकुर ने मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश और मुख्य सचिव को पत्र लिख कर प्रकरण की तत्काल जांच करा कर उचित कार्रवाई किये जाने की मांग की थी और हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की थी, जिसके बाद शशांक शेखर के विरुद्ध कार्रवाई शुरू हुई है. 

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