निरीक्षण के दौरान बार-बार क्यूं चढ़ा प्रमुख सचिव का पारा

इलाहाबाद। सूबे की सरकार से कराए जा रहे विकास योजनाओं की जमीनी सच्चाई देखने आए उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव सूर्यप्रताप सिंह ने अफसरों से सवाल किया-आप लोग आखिर करते क्या हैं? विकास योजनाओं में बीस फीसदी भी कार्य नहीं दिख रहा है। प्रमुख सचिव का सवाल सुन अफसर निरूत्तर होकर बगल झांकने को मजबूर हुए। ठंड के मौसम में भी बीडीओ साहब पसीने से तर बतर थे। अधूरे दस्तावेज और विकास योजनाओं में बदइंतजामी देख प्रमुख सचिव का पारा कई बार हाई हुआ। कई कर्मचारियों के गैर हाजिर रहने पर प्रमुख सचिव का अगला सवाल था-यह तो मालूम था कि आज निरीक्षण है, फिर भी लोग ड्यूटी से नदारद क्यों है? जवाब में बीडीओ चुप लगाए रहे। नौ से ज्यादा कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश हो गया। 
 
तीन दिसंबर को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक प्रमुख सचिव सूर्यप्रताप सिंह सूबे की सबसे बड़ी विकासखंड क्षेत्र कौड़िहार में विकास योजनाओं की हकीकत देखने आए थे। उनके साथ डीएम राजशेखर और जिले के अन्य कई अफसर थे। कौड़िहार ब्लाक पहुंचते ही उन्होंने मनरेगा की जानकारी लेनी शुरू की। सवाल किया-मनरेगा कार्य के गुणवत्ता की जांच करने की जिम्मेदारी ब्लाक स्तर पर किसकी है? मनरेगा की सोशल कोआर्डिनेटर संजिता से स्थलीय निरीक्षण और कम कार्य होने की जानकारी ली तो उन्हें बताया गया कि मनरेगा के लिए मजदूर ही नहीं मिल रहे हैं। इस जवाब की काट ब्लाक प्रमुख के पति कुंदन सिंह यादव के पास थी। कुंदन सिंह ने आरोप लगाया कि मनरेगा मजदूरों को कार्य देने के बदले उनसे दस फीसदी कमीशन मांगा जाता है। इसीलिए मजदूर मनरेगा कार्य करने पर रूचि नहीं दिखा रहे हैं। इस पर मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी का वेतन रोकने का आदेश दिया गया। 
 
जलनिगम के लगाए हैंडपंपों की संख्या तक जलनिगम के एक्सीयन साहब नहीं बता सके। उपस्थित लोगों की शिकायत थी कि सुविधाशुल्क लेकर हैंडपंप लगाए जा रहे हैं। ज्यादातर हैंडपम्पों के प्लेटफार्म न बनाए जाने की भी शिकायत सामने आई। उच्चीकृत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो स्टॉफ नर्स द्वारा महिला के प्रसव के दौरान परिजनों से डेढ़ हजार रूपए वसूलने की शिकायत ग्रामीणों ने की। इस पर प्रमुख सचिव ने आरोपी स्टॉफ नर्स को सस्पेंड करने को डीएम से कहा। राजकीय निर्माण निगम द्वारा स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए बनाए जा रहे आवासों के निर्माण का निरीक्षण किया तो यहां ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को कार्य कराते देख डीएम ने उसे पहचान लिया। प्रमुख सचिव ने ब्लैक लिस्टेड से कार्य कराने पर नाराजगी जाहिर की। खास बात यह है कि निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव कई बार गुस्साए। गौरतलब है प्रमुख सचिव की वो टिप्पणी जो उन्होंने चलते-चलते की। उन्होंने कहा काफी भ्रष्टाचार है, ये लोग कार्य करना ही नहीं चाह रहे हैं। सवाल यह है कि अगर प्रमुख सचिव भी मान रहे हैं कि काफी भ्रष्टाचार है तो इसकी काट क्या है, ताकि इस पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
 
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट 

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