निलंबित पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा का अस्पताल जाना जेल से बचने का पैंतरा तो नहीं?

राजस्थान में अजमेर शहर के निलम्बित पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा की प्रारंभिक मेडिकल जांच रिपोर्ट से लगता है कि वो जेल जाने से बचने के लिए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक मीणा की सीटी स्केन, एमआरआई, किडनी, हार्ट, लीवर, खून, ईएसआर (संक्रमण) लगभग सभी जांचें सामान्य हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारी रिपोर्ट के इंतजार में हैं कि मेडिकल बोर्ड मीणा की बीमारी को लेकर कब क्लीनचिट देगा। जिससे मीणा को वापस जेल भेजा जा सके।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सूत्रों का कहना है कि मीणा के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती होने से प्रकरण की जांच ठीक से नहीं हो पा रही है। अस्पताल के ट्रोमा वार्ड में भर्ती मीणा को मीडिया या अन्य लोगों से मिलने नहीं दिया जा रहा। लेकिन चर्चा है कि पुलिस सेवा के कुछ बड़े अधिकारी मीणा से आमजन की तरह बिना सुरक्षा गार्डो के मिल रहे है। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के प्रवक्ता डॉ.राजेश शर्मा ने बताया कि बोर्ड ने रिपोर्ट के लिए दो दिन का समय मांगा था जिसकी अवधि आज गुरूवार को पूरी हो गयी। बोर्ड की रिपोर्ट में मीणा को कोई ऐसी बिमारी नहीं मिली है जिसका अजमेर में उपचार न हो सके।

पुलिस थानों से बंधी वसूलने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अब राजस्थान लोक सेवा आयोग की भी नब्ज टटोलेगी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने राजस्थान लोक सेवा आयोग के एक आला अधिकारी को भी अनुसंधान के दायरे में ले लिया है। एक टीम जल्द ही उनके बयान दर्ज करेगी। भ्रष्टाचार के मामले में इस आयोग अधिकारी का नाम भी सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के शिकंजे में फंसने से पहले दलाल रामदेव 2 जनवरी को आयोग के इस आला अधिकारी के बंगले में बैग लेकर गया था। करीब पौन घंटे बाद रामदेव बंगले से खाली हाथ बाहर निकला था। दलाल रामदेव आयोग अधिकारी के घर में जो बैग लेकर घुसा उसमें क्या था? वह उसे बंगले में क्यों छोड़कर आया? अधिकारी और दलाल के क्या संबंध हैं? अधिकारी के बयान दर्ज करके भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इनके जवाब मांगेगा।

रमेश सर्राफ की रिपोर्ट.

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