‘नेशनल दुनिया’ में सेलरी संकट, मालिक विदेश से आएंगे तो मिलेगी सेलरी

आलोक मेहता से जब नई दुनिया का प्रधान संपादकत्व छिना तो उन्होंने आनन फानन में नेशनल दुनिया नाम से अखबार लांच कर दिया. इस अखबार में पैसा लगाया है शैलेंद्र भदौरिया ने. राजस्थान में महाराणा प्रताप के नाम से कालेज व विश्वविद्यालय चला रहे शैलेंद्र भदौरिया के विदेश चले जाने के कारण नेशनल दुनिया में काम कर रहे लोगों की सेलरी लटक गई है. जब नेशनल दुनिया के कर्मी अपने बासेज से पूछते हैं कि कब सेलरी मिलेगी, तो जवाब आता है कि मालिक विदेश गए हैं, लौटते ही चेक पर साइन हो जाएगा और सेलरी सबके एकाउंट में चली जाएगी.

पर कयासबाज इस प्रकरण को लेकर कई अन्य तरह की चर्चाएं भी उड़ा चुके हैं. बताया जा रहा है कि शैलेंद्र भदौरिया को अब समझ में आ गया है कि उनका पैसा पानी की तरह बेकार बह रहा है. नेशनल दुनिया से उनका नहीं बल्कि पत्रकारिता में सक्रिय एक खास गुट का भला हो रहा है जो पत्रकारिता के नाम पर एक खास दल के प्रवक्ता के रूप में काम कर रहा है. हालांकि अभी कुछ दिनों पहले ही खबर फैलाई गई थी कि नेशनल दुनिया मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड आदि प्रदेशों में विस्तार करेगा पर कहने वाले कहते हैं कि प्रबंधन खर्चों में भरपूर कटौती करने जा रहा है ताकि लो कास्ट पर सिर्फ प्रतीकात्मक तौर पर कई राज्यों से अखबार निकाला जा सके और इस अखबार को दिखाकर कुछ दलों व समूहों से पैसे लिए जा सकें.

एक अन्य सूचना के मुताबिक नेशनल दुनिया ने गाजियाबाद स्थित आरडीसी राजनगर में अपना जंबो कार्यालय बंद करने का फैसला लिया है. सूत्रों के अनुसार नेशनल दुनिया प्रबंधन नें लाखों रुपये के खर्च से चल रहे इस कार्यालय को तत्काल बंद कर नया कार्यालय का आरडीसी राजनगर में ही पचास फीसदी कम किराए पर अनुबंध किया है. कारपोरेट कंपनी स्तर से इस कार्यालय को वर्ष 2008 में नईदुनिया अखबार समूह ने बनाया था. नईदुनिया का़ दिल्ली संसकरण बंद होने और जागरण समूह द्वारा खरीदे जाने के बाद नेशनल दुनिया अखबार प्रबंधन ने तत्काल इसमें अपना कार्यालय शुरू कर दिया था. नेशनल दुनिया प्रबंधन ने अब अंसल समूह के भवन आरडीसी राजनगर गाजियाबाद में अपना नया कार्यालय बनाने का तात्कालिक निर्णय लिया है. नेशनल दुनिया प्रबंधन को पुख्ता जानकारियां मिली है कि कुछ लोग बिजली बिल, किराये आदि के मद में अच्छा पैसा बना रहे हैं. इसी कारण खर्च बचाने के मकसद से नया आफिस लिया गया है. भविष्य में कई अन्य तरह की कटौतियां भी की जाने वाली हैं. फिलहाल देखना है कि नेशनल दुनिया के पत्रकारों को सेलरी कब मिलती है.

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