नौकरी तो मिलेगी, लेकिन शिक्षा मंत्री का स्टिंग करना पड़ेगा (कहानी)

वह उस पल को कोसने लगी जब मीडिया में कैरियर बनाने के लिेये मास्टर आफ जर्नलिज्म एण्ड मास काम्युनिकेशन में दाखिला लिया था। शहर भर के मीडिया हाऊस में धक्के खाने के बावजूद उसे स्ट्रिंगर या संवाद सूत्र से ज्यादा किसी ने आफर नहीं किया। किसी ने उसे सलाह दी मीडिया में ठीकठाक नौकरी चाहिये तो नोयडा जाओ। आप्शन था नहीं लिहाजा सलाह मानना उसकी मजबूरी थी।  लेकिन यहां हालात और भी बदतर। कोई बात तक करने को तैयार नहीं।

सीवी डालकर एक मीडिया हाऊस से निकल रही थी। बाहर ही इंस्‍टीट्यूट की सीनियर मिली। अरे तू यहां कैसे। कुछ नहीं मैम नौकरी की तलाश में आयी थी। सीनियर ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। प्लेन शलवार, छापदार कुर्ता, करीने से पड़ा दुपट्टा। बालों में तेल, चेहरा बिना आईब्रो फेशियल और थ्रेडिंग का। सीनियर ने कहा तुम वापस लौट जाओ। क्यों मैम उसने हैरत से पूछा। अगले दिन वह फिर एक मीडिया हाऊस में नौकरी मांगने गयी। आज उसका लुक बदला था। मार्डन कपड़ों में लिपटी वह आधुनिकता की मिसाल नजर आ रही थी। चैनल के एमडी ने उसे देखा तो देखता ही रहा। सर मैं रिपोर्टिंग में इंटरेस्टेड हूं।

ठीक है आप को नौकरी तो मिलेगी लेकिन पहले एक स्टिंग करना होगा। मरता क्या न करता, ठीक है सर आप प्रोजेक्ट बताईये। एजुकेशन मिनिस्टर का सेक्स स्कैंडल स्टिंग करना है। ठीक है सर उसका अफेयर किससे है। किसी से नहीं। क्या मतलब। मतलब मत पूछो, एक महीने का समय तुम्हारे पास है। टेप लाओ और कन्फर्मेशन पाओ। ओपेन आफर। ओके सर, यहां से उसने सीधे एजुकेशन मिनिस्टर के बंगले का रुख किया। इसे उसकी किस्मत कहें या फर्स्ट साइट ऐटरेक्शन का कमाल। एजुकेशन मिनिस्टर ने न सिर्फ उसे पर्सनल नम्बर दे दिया बल्कि दो चार मुलाकातों के बाद ही अपनी विदेश विजिट में साथ जाने का आफर भी दे डाला। उसकी तो जैसे मुराद ही पूरी हो गयी। गये तो थे विदेश में एजुकेशन सिस्टम को समझने लेकिन पांच दिन का टूर होटल के कमरे में ही पूरा हो गया। वापसी में मिनिस्टर खुश था अपनी जिन्दगी से और वह फूली नहीं समा रही थी खुद की कामयाबी पर।  

विजय मुद्रा में आफिस पहुंची तो एमडी का रोम रोम भी पुलकित था। टेप रिवर्स करके देखा तो एमडी कुर्सी पर ही उछल पड़ा। गुड, कमाल कर दिया तुमने। लेकिन सर मेरा चेहरा तो आन एयर नहीं हो जायेगा। कैसी बातें करती हो एथिक्स भी कोई चीज होती है। ब्लर करके चलायेंगे। घंटे भर बाद स्टोरी आन एयर हुयी तो उसके पास बधाइयों का तांता लग गया। दूसरे चैनलों के आफर भी आने लगे। कोई पांच डिजिट में सैलेरी आफर कर रहा था तो कोई छह डिजिट का पैकेज देने पर तैयार। एजुकेशन मिनिस्टर को पार्टी ने सस्पेंड कर दिया था। खबर की जबरदस्त टीआरपी और बड़े असर से उत्साहित एमडी के पास पहुंची तो उन्होंने जबर्दस्त इस्तेकबाल किया। आओ आओ यह लो तुम्हारा कन्फर्मेशन लेटर बधाई हो। लेकिन सर यह क्या सैलरी इतनी कम। हां अभी रिसेशन चल रहा है जल्द ही तुम्हारी सैलरी भी बढ़ जायेगी। बात तकरार में बदली तो वह गुस्से से पैर पटकती वापस चली गयी।

छह डिजिट का आफर देने वाला चैनल उसे हाथों हाथ ले रहा था। अगले हफ्ते आफर लेटर आकर ले जाने का तय हुआ और वह घर चल दी। हफ्ते भर की भागदौड़ के बाद बिस्तर का रुख किया तो अगले बारह घंटे तक वह नींद की आगोश में रही। अगले दिन सूरज चढ़े आंख खुली तो टीवी पर ब्रेक चल रहा था। आज शाम प्राईम टाईम पर देखिये मिनिस्टर रिटर्न ठीक आठ बजकर सत्तावन मिनट पर सिर्फ हमारे साथ इक्सक्लूसिव। दूसरे चैनल पर चल रहा था देखिये एक्सक्लूसिव हमारे साथ आठ बजे बेदाग मिनिस्टर, तीसरे चैनल पर चल रहा था साजिश का राजफाश सिर्फ हमारे साथ एक्सक्लूसिव प्राईम टाईम पर। अब तक वह सब समझ चुकी थी। रिमोट पर उंगलियां चल ही रही थीं कि अचानक एक चैनल पर चीफ मिनिस्टर की बाईट चल रही थी। ऊपर एक्सक्लूसिव का सुपर भी चल रहा था। चीफ मिनिस्टर बोल रहे थे, सीडी की जांच रिपोर्ट आ गयी है। टैम्परिंग के सुबूत मिले हैं, मिनिस्टर का सस्पेंशन वापस लिया जाता है।

वह भागी भागी आफिस पहुंची। बाहर ही रिसेप्शनिस्ट ने रोक दिया। मायूस होकर बाहर निकली, एजुकेशन मिनिस्टर अन्दर दाखिल हो रहे थे। मिनिस्टर उसे देखते ही मुस्कराया और कहा अरे तुम यहां कैसे, यहां से तो तुम्हारा कान्ट्रैक्ट खत्म हो गया है। उस चैनल ने भी तुम्हे आफर लेटर देने से मना कर दिया है जो अगले हफ्ते देने वाला था। मुझे बदनाम करने वाले को कोई नौकरी देकर अपना बिजनेस थोड़ी चौपट करेगा। पांच करोड़ का ऐड दिया है मैंने। वैसे एक एक करोड़ का रिलीज आर्डर सभी चैनल को अगले महीने फिर देने वाला हूं। यहां आया था चैनल ने मेरी बेगुनाही को लाईव दिखाने के लिये बुलाया है। वैसे अगले महीने यह लोग फिर मुझे लाईव दिखायेंगे अपनी यूनिवर्सिटी के उद्घाटन मौके पर। मेरे विभाग से मिलने वाली एऩओसी कई महीने से पेंडिंग पड़ी थी, आज ही मैंने एप्रूवल दिया है। वह शर्म से गड़ी जा रही थी। चाहा कि बच कर निकल जाये लेकिन मिनिस्टर ने उसका रास्ता रोकते हुये कहा चली जाना मेरा थैंक्स तो लेती जाओ। और हां एक बात और उस विदेश यात्रा में मजा बहुत आया था।

कहानीकार सैयद हुसैन अख्‍तर पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. उनसे संपर्क sakhtar2002@rediffmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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