न रेड्डी-रेड्डी रहे और न श्रीरामुलु-श्रीरामुलु और न ही थाई-थाई रहीं

Mayank Saxena : वो सुषमा को 'थाई' कहते थे, थाई मतलब कन्नड़ में 'मां' बड़े मधुर सम्बंध से सुषमा से उनके चार बेटों के…तीन सगे भाई थे और एक उनका रिश्तेदार…तीन भाई मां को गोद लेने के पहले तक साइकिल से घूमते थे और जैसे ही 'मां को एडॉप्ट' किया जीवन ही बदल गया…लोहे के अवैध खनन से बेल्लारी उनकी रियासत हो गई और रेड्डी वहां के राजा…दिल्ली में फंडिंग और हिस्सा पहुंचा तो पार्टी के अंदर भी उनके समेत उनकी 'थाई' का रसूख बढ़ गया…अवैध खनन से इतना पैसा आया कि 'थाई' को बेल्लारी से चुनाव लड़वा दिया और फिर कर्नाटक की कीचड़ में कमल खिला तो पूरा कर्नाटक ही बेल्लारी हो गया…

लेकिन समय तो समय है और सीबीआई इसका पूरा फ़ायदा उठाती है, वक़्त ने हंसी सितम किया और न रेड्डी-रेड्डी रहे और न श्रीरामुलु-श्रीरामुलु और न ही थाई-थाई रहीं, बेटे करप्शन में नप कर जेल चले गए और मां ने पल्ला झाड़ कर ममता का आंचल हटा लिया…अब पार्टी से कट्टी कर चुके श्रीरामुलु वापस पार्टी में हैं…विष्णु मुद्रा में हाथ में कमल पकड़े भगवान श्री नरेंद्र और भगवान श्री राजनाथ के आगे खड़े, कह रहे हैं कि देश बचाने के लिए मैं भगवान के हाथ में सत्ता देखना चाहता हूं…पहले लोहा बेचा है, अब देश भी तो बेचना है…भगवान उनको आशीर्वाद स्वरूप टिकट दे रहे हैं…

और मां नाराज़ हैं…मां बेटे के टिकट के खिलाफ खड़ी हैं…मां की ममता अब शत्रुता में बदल चुकी हैं…आपने वो कीर्तन मंडली के कर्कश स्वर में वो भजन सुना होगा…

"पूत कपूत सुने हैं पर न माता सुनी कुमाता"

मतलब मां कभी बेटे की शत्रु नहीं होती है…लेकिन ये मां नहीं 'सुष'मां है…मां अब बेटे को टिकट देने के खिलाफ भगवान श्री राजनाथ को चिट्ठी लिख चुकी हैं लेकिन बात सुनी नहीं गई है…तो अब पब्लिक ट्वीट कर के विरोध कर रही हैं…भगवान हैं कि मां की सुनते ही नहीं हैं…शायद भगवान मानते हैं बेटे से नाराज़ मां, मां नहीं रहती और राजनीति में कोई किसी का मां-बाप नहीं होता… सुष'मां' जी…ये समय है, और राजनीति में गलत सही सिर्फ समय होता है…क्योंकि लोग तो सिर्फ ग़लत ही होते हैं…

जय भगवान श्री नरेंद्, जय भगवान श्री राजनाथ, जय श्री सुष'मां', जय हो रेड्डी भाईयों की…डॉ. श्रीरामुलु अमर रहें…अधर्म की जय हो धर्म का ढोंग हो…

पत्रकार मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.
 

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