Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

आवाजाही, कानाफूसी...

पंचोली ने होली से पहले ऑफ रद्द किया और पैसे भी काटे

अमर उजाला के लखनऊ संस्करण के संपादक इन्दुशेखर पंचोली की तानाशाही लगातार बढ़ती जा रही है। पंचोली का व्यवहार पुराने दौर के उस जमींदार जैसा रहा है, जिसके यहां काम करने वाले लोग किसी बंधुआ मजदूर से अधिक नहीं होते। आप फील्ड में हुआ करें बहुत बड़े पत्रकार, देश-दुनिया के अधिकारों की बात किया करें, राजनेताओं, अफसरों को कुछ न समझते हों, लेकिन पंचोली के कार्यालय में आपकी बिसात दिहाड़ी मजदूर से ज्यादा कुछ भी नहीं।

अमर उजाला के लखनऊ संस्करण के संपादक इन्दुशेखर पंचोली की तानाशाही लगातार बढ़ती जा रही है। पंचोली का व्यवहार पुराने दौर के उस जमींदार जैसा रहा है, जिसके यहां काम करने वाले लोग किसी बंधुआ मजदूर से अधिक नहीं होते। आप फील्ड में हुआ करें बहुत बड़े पत्रकार, देश-दुनिया के अधिकारों की बात किया करें, राजनेताओं, अफसरों को कुछ न समझते हों, लेकिन पंचोली के कार्यालय में आपकी बिसात दिहाड़ी मजदूर से ज्यादा कुछ भी नहीं।

अमर उजाला के इस संस्करण में पत्रकारों से किये जाने वाले व्यवहार की खबरें पहले भी आ चुकी हैं और कई तो मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं। कुछ दिनों पहले डेस्क पर काम करने वाले एक साथी का तो पीजीआई में इलाज चल रहा है और उसने कार्यालय न जाने का निर्णय कर लिया है। पंचोली की तानाशाही का ताजा नमूना डेस्क पर काम करने वाले साथियों के एक बड़े समूह का साप्ताहिक अवकाश रद्द किया जाना है। होली के पहले करीब एक माह से इन साथियों का साप्ताहिक अवकाश तो रद्द है और इस पर भी अगर किसी साथी ने भूले-भटके या अपने किसी अत्यन्त आवश्यक कार्य के कारण कभी इसे लेने की जुर्रत की है तो उन्हें दो-तीन दिनों का वेतन काट लेने की कड़ी सजा दी गयी है। साप्ताहिक अवकाश रद्द, बढ़ती महंगाई और त्योहारों के समय वेतन काट लिये जाने का यह तुगलकी फरमान बीते दौर के गुलामों पर किये जाने वाले कठोर शासन की याद दिलाता है।

बताया जाता है कि साप्ताहिक अवकाश रद्द करने का फरमान पंचोली ने एक माह पहले तब जारी किया था, जब एक दिन पेज थोड़ा देर से छूटा था। पेज में देरी की वजह खबरों की आमद, सम्पादन, पेज को पढ़े जाने में लगने वाला समय, सिस्टम की गति, पेजों की अचानक संख्या बढ़ जाने, विज्ञापन लगने में देरी सहित तमाम कारणों से जुड़ी होती हैं, लेकिन पंचोली ने बिना इस पर विचार किये साप्ताहिक अवकाश रद्द कर दिया। वैसे साप्ताहिक अवकाश रद्द कर देना पंचोली की आदत में शुमार है। विधानसभा चुनाव, नगर निगम चुनाव सहित पिछले वर्ष कई अवसर आए हैं जब अमर उजाला के सम्पादकीय कर्मियों ने कई कई महीनों तक बिना साप्ताहिक अवकाश के काम किया है। लम्बे समय तक साप्ताहिक अवकाश के बिना काम करने पर उन अवकाशों को समायोजित करने की गुंजाइश भी नहीं रह जाती, क्योंकि उन्हें एक माह के भीतर ही समायोजित किये जाने का नियम भी बनाया जा चुका है। जहां कुछ दूसरे समाचार पत्रों में सम्पादकीय कर्मियों पर सप्ताह में दो साप्ताहिक अवकाश दिये जाने पर विचार हो रहा है और कुछ जगहों पर यह व्यवस्था लागू भी है, अमर उजाला लखनऊ में यह व्यवस्था बताती है कि यहां न जाने की किस दौर में काम किया जा रहा है?

साथियों का यह भी कहना है कि पंचोली के अनुसार, किसी चीज को बेहतर ढंग से कवर करने का मतलब है कि उसको अधिक से अधिक छापा जाय। ऐसे में महीने में चार-छह अवसर हमेशा आ जाते हैं, जब दो से चार पेज बढ़ा दिये जाते हैं। इनके लिए आदमी नहीं बढ़ाये जाते हैं, बस काम बढ़ा दिया जाता है। ऐसे में पेज में थोड़ी बहुत देरी के लिए साथियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन अमर उजाला का उच्च प्रशासन भी पंचोली के इस कार्यप्रणाली से आँख मूंदे पड़ा है। ऐसे ही हालातों में पिछले दिनों डीएनई धर्मेन्द्र सिंह को अप्रिय स्थितियों का सामना करना पड़ा था और अन्ततः उन्होंने संस्थान छोड़ देना ही बेहतर समझा था। साथियों का विश्वास है कि घड़ा कभी न कभी भरकर फूटेगा, देखना है यह इन्तजार कितना लम्बा होता है…। (कानाफूसी)

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...