पचास घंटे बाद भी हेमंत पर हमला करने वाले पुलिस की पकड़ से बाहर, मुलायम से मिले पत्रकार

लखनऊ। जागरण चौराहे के पास गत 7/8 जून की रात वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी पर जानलेवा हमले के प्रयास से शहर का पत्रकार जगत सकते में है। हमलावरों ने उनकी गाड़ी को भारी नुकसान पहुंचाया और मौके पर मौजूद लोगों पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की। इसके पीछे कुछ आपराधिक तत्वों का हाथ बताया जा रहा है। पुलिस के शीर्ष अफसर उन्हें धर दबोचने में जुटे हुए हैं। इस सिलसिले में पत्रकारों का एक शिष्टमंडल सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से भी मिला। श्री सिंह ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी एक ज्ञापन देकर घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है।

श्री तिवारी पिछले करीब 26 सालों से लखनऊ में पत्रकारिता कर रहे हैं। पत्रकार संगठनों में वे महत्वपूर्ण भूमिका में भी रहे हैं। इस अप्रत्याशित घटना से वे स्वयं भी भयभीत हैं और अपने तथा अपने परिवार के लिए खतरा महसूस कर रहे हैं। हमले की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी अनुराग यादव उसी समय मौके पर पहुंच गये थे। हमलावरों को पहचानने और उन्हें पकडऩे की उन्होंने अपने स्तर पर कोशिश भी करायी। पर पुलिस की भूमिका इस मामले में संदेह के घेरे में रही। तत्काल पुलिस के स्तर से जो कार्रवाई होनी चाहिए थी, नहीं हुई। यह हादसा पुलिस मुख्यालय से बिल्कुल करीब जागरण चौराहे पर हुआ और ४८ घंटे से ज्यादा वक्त बीत जाने  के बाद भी अपराधियों के खिलाफ  कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

श्री तिवारी ने मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में घटना का जो विवरण दिया है, उसके मुताबिक 7/8 जून की रात साढ़े बारह बजे वे प्रेस क्लब से अपने बटलर पैलेस स्थित घर जा रहे थे। ड्राइवर अनिल कुमार पांडेय गाड़ी चला रहा था। गाड़ी दैनिक जागरण चौराहे से जापलिंग रोड पर मुड़कर कुछ ही दूर गयी थी कि पीछे से काले रंग की एक सफारी ने जोर से हार्न बजाया और फिर श्री तिवारी की गाड़ी को ओवरटेक करके जबरन रोक लिया। जब तक वे कुछ समझ पाते, चार पांच लोग सफारी गाड़ी से उतरे और गालियां बकते हुए हाकी और डंडों से हमला कर दिया। जान पर खतरा देख वे गाड़ी से उतर कर भागे और तुरंत  पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इस बीच जागरण चौराहे की तरफ  से कुछ लोग मदद के लिए दौड़े तो हमलावर धमकी देते हुए भाग निकले। तब तक उन्होंने गाडी को काफी नुकसान पहुंचा दिया था|

थोड़ी ही देर में जागरण चौराहे पर काफी भीड़ जमा हो गयी। सभी हतप्रभ  खड़े ही थे कि टाइम्स ऑफ  इंडिया की तरफ  से वही गाड़ी दोबारा आयी। गाड़ी को रोकने का प्रयास किया गया लेकिन उसने गाड़ी रोकने के बजाय वहाँ खड़े लोगों, जिनमें पुलिस वाले भी शामिल थे, को कुचलने का प्रयास किया। घबराहट में भीड़ इधर-उधर हट गयी। श्री तिवारी का कहना है कि गाड़ी का नंबर यूपी-63 एच 0001 है। उन्होंने अपनी सूचनाओं के आधार पर बताया कि मुख्य हमलावर का नाम दुर्गेश चौरसिया है। यह भी मालूम हुआ कि वह कई आपराधिक मामलों में शामिल है।

घटनास्थल के आसपास कई अखबारों के दफ्तर हैं। पुलिस मुख्यालय भी पास में ही है। ऐसे स्थान पर इस तरह की दुस्साहसिक घटना को अंजाम देना अपने आप में शांति एवं लोकव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। यह बात समझ में नहीं आती कि इतना समय बीत जाने के बाद भी पुलिस न तो उसे गिरफ्तार कर सकी है और न ही गाड़ी बरामद कर सकी है। श्री तिवारी ने अपने जान-माल की हिफाजत के लिए इस मामले में मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

लखनऊ से एक पत्रकार की रिपोर्ट.

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