पत्नी पीड़ित चार हजार पति लापता…. आईआईटी में लगातार आत्महत्याएं….

Sanjay Tiwari : पति सताए तो कानून बचाए लेकिन पत्नी सताए तो पति कहां जाए? पढ़कर भौचक्क हूं कि अकेले जबलपुर में बीते पांच साल में पत्नी की प्रताड़ना से परेशान करीब साढे चार हजार पति लापता हो गये जिसमें ज्यादातर अब नर्मदा के किनारे सन्यासी होकर जीवन बिता रहे हैं।

हमारे देश के वित्त पोषित धूर्त बुद्धिजीवी हों कि सरकार, वे कभी इस नजरिए से नहीं सोच पाते कि वे जो इलाज करते हैं उससे बीमारी कितनी बढ़ जाती है और आखिरकार उस बीमारी का वह औरत खुद कितना शिकार होती है। जो खबर पढ़ी उसमें औरतें खुद अपने पतियों को तलाश रही हैं लेकिन पति लापतागंज के वासी हो गये हैं। अमेरिका और यूरोप से आयात किये जा रहे कानून केवल पति पत्नी को ही परेशान नहीं कर रहे हैं बल्कि परिवार और समाज का भी सत्यानाश कर रहे हैं।

दिल्ली के वेब जर्नलिस्ट संजय तिवारी के फेसबुक वॉल से.

Zafar Irshad : आखिर क्यों करते है आईआईटी जैसे प्रसिद्ध इंस्टीट्यूट के छात्र आत्महत्या? लास्ट 35 दिन में यह दूसरी प्रतिभा का क़त्ल था… कल फिर एक होनहार बीटेक कंप्यूटर साइंस के छात्र ने आत्महत्या कर ली… कर्नाटक का रहने वाला मंजूनाथ अपने घर का इकलौता बच्चा था… वो गरीब तो था ही साथ में पैर से विकलांग भी था…

आईआईटी का कहना है कि वो डिप्रेशन का शिकार था… इतने बड़े संस्थान के अधिकारी ऐसा बयान दे कर पल्ला नहीं झाड़ सकते है… हमने एक आरटीआई डाली थी इस मसले पर, जो जवाब मिला था कि लास्ट 7 साल में 11 बच्चे आत्महत्या कर चुके हैं यहाँ… आखिर सरकार इस और ध्यान क्यों नहीं देती है, कि हमारे देश की अनमोल प्रतिभा यूँ फांसी पर लटक जाए या ज़हर खा लें…कुछ करो सत्ता में बैठे हुए लोगो, यूँ प्रतिभा को अकाल मौत न मरने दो प्लीज…

कानपुर के पत्रकार जफर इरशाद के फेसबुक वॉल से.

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