पत्रकारिता के मास्टरों-छात्रों ने भी हिंदी न्यूज चैनलों को उनके हाइपर रवैये पर खरी-खोटी सुनाई

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में देश के लिए कौतुहल का केंद्र बना उन्नाव जिले के डौडिया खेड़ा गांव में हो रही महाखजाने की खुदाई पर चर्चा आयोजित की गई। इसमें खजाने की खुदाई को लेकर हुए घटना क्रम पर छात्रों और शिक्षकों ने अपने विचार रखे। कौतुहल के पीछे एक साधु के सपने की सत्यता पर भी सवाल उठाए गए।

प्राध्यापक डॉ अवध बिहारी सिंह ने कहा कि आज आम आदमी के सपनों की किसी को चिंता नहीं है दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में उसकी पूरी जिंदगी बीत जा रही है।एक तरफ किसी 'बाबा' की काली करतूतों को मीडिया उजागर कर रहा है वही दूसरी तरफ एक बाबा के सपने को इतनी जगह दे रहा है। टी आर पी बढाने के चक्कर में मीडिया महत्वपूर्ण मुद्दों को दर किनार कर रही है जो देश के लिए शुभ संकेत नहीं है।

प्राध्यापक डॉ दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि आज हम जिस वैज्ञानिक युग में जी रहे है उसमें किसी बाबा के सपने को इतना महिमामंडित करने की जरूरत नहीं है। आज पूरे देश की निगाह सोने पर टिकी हुई हैं सोना मिलने के पहले ही बवाल मचा हुआ है। भारत के इतिहास में यह जो अध्याय जुड़ेगा वह बहुत सारे प्रश्न समय समय पर उठाता रहेगा।यह भी सोचने वाली बात है कि यदि खुदाई में सोना नहीं मिला तो जगहँसाई से कैसे बचा जायेगा।

मीडिया और महाखजाने की खुदाई पर अपनी बात रखते हुए प्राध्यापक डॉ सुनील कुमार ने कहा कि किसी बाबा के सपने की सत्यता को परखे बिना सरकार को इतना बड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए। स्वामी विवेकानंद ने जिस भारत को विश्व गुरु बनने की बात की थी खुदाई के बाद यदि सोना नहीं निकला तो हमारे देश की आस्था और आध्यात्मिकता पर प्रश्न चिन्ह लग जायेगा। सरकार को अगर लग रहा था कि यहाँ सोना है तो ड्रिल कराकर उसकी वास्तविकता का पता लगा लेना चाहिए था। आज पूरे विश्व की निगाह डौडिया खेड़ा गांव की महा खुदाई पर टिकी है। छात्र अबू तल्हा, हसन इमाम, श्रीवेश यादव, अमित कुमार, राजेश यादव, श्वेता मिश्रा ने वैज्ञानिक युग में इस तरह की घटनाओं को अप्रासंगिक बताया। संचालन छात्र आशीष सिंह ने किया।

प्रेस विज्ञप्ति

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