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पत्रकारिता ब्राह्मणवाद का एक हथियार है : शंभूनाथ शुक्‍ल

Shambhunath Shukla : एक लंबा समय पत्रकारिता में बिताने के बाद मुझे लगता है कि भारत में पत्रकारिता ब्राह्मणवाद का एक हथियार है। ब्राह्मणवाद उसे वाम और दक्षिण दोनों तरह से इस्तेमाल करता है। जब किसी मामले में खुद को प्रगतिशील दिखाने की इच्छा हुई ब्राह्मणवाद का वाम अस्त्र चलाया गया और जब चाहा उसे दक्षिणपंथी हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया। इसमें सेकुलर और कम्यूनलिज्म दोनों तरह के तत्व शामिल हैं।

Shambhunath Shukla : एक लंबा समय पत्रकारिता में बिताने के बाद मुझे लगता है कि भारत में पत्रकारिता ब्राह्मणवाद का एक हथियार है। ब्राह्मणवाद उसे वाम और दक्षिण दोनों तरह से इस्तेमाल करता है। जब किसी मामले में खुद को प्रगतिशील दिखाने की इच्छा हुई ब्राह्मणवाद का वाम अस्त्र चलाया गया और जब चाहा उसे दक्षिणपंथी हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया। इसमें सेकुलर और कम्यूनलिज्म दोनों तरह के तत्व शामिल हैं।

इस पेशे में आकर दलितवादी और ओबीसीवादी तथा सवर्ण सभी पत्रकारिता के ब्राह्मणवाद के शिकार हो जाते हैं। यहां तक कि अल्पसंख्यक भी इस पेशे में ब्राह्मणों की बोली बोलने लगते हैं। भले किसी संस्थान में ब्राह्मण जाति के लोग न हों लेकिन यह तो घेरा ही ब्राह्मणवाद का है इसलिए जो यहां आएगा ब्राह्मणी चक्रव्यूह में फंसेगा ही। आप देखेंगे जितने महान पत्रकार सम्मानित किए जाते हैं अथवा करवाए जाते हैं या खुद जुगाड़ करके समादृत होते हैं वे किस जाति के होते हैं और उनका योगदान क्या होता है? अमुक जिले में अमुक पत्रकार सम्मानित। उनकी योग्यता क्या है? वे वयोवृद्ध हैं, सरकार या अफसरों के खिलाफ ताउम्र लड़ाई लड़ते रहे लेकिन उस पत्रकार का सामाजिक योगदान क्या है?

यही न कि उसने एक स्टोरी हिट की या दलितों के हक के लिए लड़ता रहा अथवा महिलाओं की तरक्की के लिए उसने महान काम किए? किसान मजदूरों के लिए लड़ा? पर अगर उसने अपनी स्टोरीज का फालोअप नहीं किया तो एक बार सत्य, हालांकि वह भी जो ब्राह्मणों को रुचे वही सत्य होता है, का उजागर करके भी वह प्रतिक्रियावादी पत्रकारिता कर रहा होता है। पत्रकारिता को स्वच्छ और सत्यान्वेषी बनाना है तो कारपोरेट घरानों के हाथों पत्रकारिता को आजाद करा कर उसे जनवादी हाथों में पहुंचाना होगा। आज तक किस पत्रकार ने इस तरह की लड़ाई लड़ी और उसे किसी संस्था ने सम्मानित किया? आप बताएंगे।

वरिष्‍ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्‍ल के एफबी वॉल से साभार.

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