पत्रकारों के खिलाफ दिग्विजय सिंह ने रची थी साजिश : के. विक्रमराव

भोपाल : इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. विक्रमराव और राष्ट्रीय महासचिव परमानंद पांडेय लंबे अंतराल के बाद राजधानी पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी भोपाल इकाई के आधिपत्य वाले पत्रकार भवन में नए कार्यालय भवन का उद्घाटन किया। श्री विक्रमराव ने अपने भाषण में पत्रकारों की इस राय से सहमति जताई कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ही मध्यप्रदेश के पत्रकारों के खिलाफ गहरे षड़यंत्र करवाए जिससे पूरे देश में मध्यप्रदेश की भारी बदनामी हुई।

लगभग डेढ़ दशक बाद भोपाल के पत्रकार भवन पहुंचे श्री राव ने पत्रकार भवन में कराए जा रहे नए निर्माण कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि लगभग साढ़े चार दशक पहले बना पत्रकार भवन मध्यप्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार की हरकतों और कुछ षड़यंत्रकारियों की वजह से आईएफडब्ल्यूजे के आधिपत्य से निकल गया था।मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने एक सराहनीय फैसले में अंततः इस भवन को आईएफडब्ल्यूजे से संबद्ध जिला इकाई को इस भवन का असली स्वामी बताया है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर कुछ सरकारों को पत्रकारों का एकजुट रहना पसंद नहीं आता है इसलिए वे उन्हें आपस में लड़वाने के लिए तरह तरह के षडयंत्र करती रहती हैं। उन्होंने कहा कि जब तक जनहित का कोई बड़ा मुद्दा न हो हम कभी राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करते हैं। जबकि कुछ सरकारों को लगता है कि वे प्रेस पर नियंत्रण करके अपनी मनमर्जी चला सकेंगी।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पत्रकारों के खिलाफ षड़यंत्र रचते हुए यहां चुनावों की परंपरा ही समाप्त कर दी गई थी। पत्रकारों के राष्ट्रीय सम्मेलन में जो पत्रकार मध्यप्रदेश से पहुंचते थे वे आते तो रेल की दो बोगी भरकर थे लेकिन टिकिट केवल पचास ही खरीदते थे। उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड ने यहां की इकाई की इन गड़बड़ियों की शिकायत बाकायदा पत्र भेजकर की थी। उन्होंने कहा कि यूनियन बाजी के नाम पर यहां जो लालच किया गया उससे मध्यप्रदेश इकाई के कारण हमें भी अपमानित होना पड़ता था। श्री राव ने बताया कि जब वे एक बार सीहोर के दौरे पर गए तो उन्हें बताया गया कि यहां उनके संगठन की सदस्यता 97 है। एक छोटे से जिले में आखिर इतने पत्रकार कहां से आ गए ये जानने के लिए जब हमने जांच कराई तो पता चला कि लोगों से बाकायदा धन लेकर उन्हें पत्रकार के कार्ड थमा दिए गए थे।

अपने कटु अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां के पत्रकारों ने जब पांडिचेरी अधिवेशन में शराब पीकर गुजरात और उत्तरप्रदेश की महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार किया तो मजबूर होकर हमें यहां के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगना पड़ा। यहां के अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा तब हमें मजबूर होकर उसे छह साल के लिए आईएफडब्ल्यूजे से निष्कासित करना पड़ा। इसके बाद हमारे संगठन के नाम का अनुवाद करके नया संगठन बना लिया गया जो घोर अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। उन्होंने कहा कि आईएफडब्ल्यूजे कभी अपने समानांतर संगठन चलाने की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा। लोकतांत्रिक पद्धति से जो सदस्य चुने जाएंगे केवल वही संगठन के पदाधिकारी बन पाएंगे।

श्री के. विक्रमराव ने कहा कि मध्यप्रदेश की तत्कालीन सरकार की ही जांच में पाया गया था कि पत्रकार भवन के संचालन में भारी आर्थिक अनियमितताएं की गईं थीं। अब हाईकोर्ट ने माना है कि सरकार ने पत्रकार भवन का अधिग्रहण करके गलती की थी। जब दस्तावेजों पर ये प्रमाणित हो गया कि पत्रकार भवन आईएफडब्ल्यूजे से संबद्ध जिला इकाई की संपत्ति है तो जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट की मंशा के आधार पर आनन फानन में चुनाव करवाए। ये चुनाव 1995 की किसी सूची को आधार मानकर मनोनयन के नाम पर करवाए गए।यदि जिला प्रशासन अपने निर्देशन में भोपाल के सभी पत्रकारों का सदस्यता अभियान चलाता और जांच के बाद आम पत्रकारों को इस सूची में शामिल करता तो निष्पक्ष पत्रकार भवन समिति बनाई जा सकती थी। जो पत्रकार साथी इतने बरसों की ऊहापोह में दूसरे संगठनों में चले गए थे वे भी वापस आईएफडब्ल्यूजे की सदस्यता ले सकते थे। उन्होंने कहा कि अभी जो चुनाव कराए गए हैं वे तार्किक नहीं हैं। इन्हें अदालत में चुनौती भी दी जा सकती है। ये बात सही है कि भोपाल के पत्रकारों ने केवल सकारात्मक रवैया अपनाकर इस समिति को भी अपना सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि ये अच्छा संकेत है और उम्मीद है कि भविष्य में मध्यप्रदेश की पत्रकारिता नई ऊंचाईयां अवश्य छुएगी।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की यूनियन ने कभी भी पत्रकारों के लिए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की पहल नहीं की। न तो श्रम कानूनों को लागू करने का दबाव बनाया गया और न ही पत्रकारों की दुर्दशा सुधारने के लिए कोई प्रयास किए गए। पत्रकारों के हित में अब यदि इस तरह के प्रयास किए जाएंगे तो राष्ट्रीय इकाई उसमें हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि मध्यप्रदेश की इकाई में अच्छे और सक्रिय पत्रकार शामिल हों ताकि मध्यप्रदेश में पत्रकारों की दुर्दशा सुधारी जा सके।

भोपाल से आलोक सिंघई की रिपोर्ट.

 

 
 

 

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