पत्रकार उत्पीड़न पर मानवाधिकार आयोग ने भेजा भदोही के एसपी को नोटिस

भदोही। संत रविदास नगर, भदोही के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश गांधी के खिलाफ हुए, पुलिस एवं प्रशासनिक उत्पीड़न की कार्यवाही को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सक्रिय हो गया है. आयोग के असिस्टेन्ट रजिस्ट्रार (लॉ) ने पुलिस अधीक्षक संत रविदास नगर, भदोही को पत्र भेजकर श्री गांधी पर हुए उत्पीड़न की कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी है. पत्र में कहा गया है कि कार्यवाही किस आधार पर की गयी है. प्रकरण की सक्षम अधिकारी से जांच कराकर रिपोर्ट आयोग को भेजने का निर्देश दिया गया है. एसपी की जांच रिपोर्ट को आयोग अंतिम मानेगा. एसपी की जांच रिपोर्ट के बाद आयोग अपने तरीके से जांच करेगा.

श्री सुरेश गांधी ने बताया कि वह मेहीलाल बिल्डिंग स्टेशन रोड भदोही में किराए के मकान में रहकर पिछले 15 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं. गत दिनों पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की नाकामी और गैर जिम्मेदाराना कार्यों सहित भदोही में हुए दंगे में प्रशासनिक लापरवाही व जनप्रतिनिधियों के काले कारनामों को उजागर करने पर डीएम, एसपी व कुछ जनप्रतिनिधि कुपित हो गये. इसलिए साजिश के तहत कोतवाल भदोही संजयनाथ तिवारी ने बिना किसी अपराध पत्रकार के खिलाफ धारा 110 जाब्ता फौजदारी के अन्तर्गत उपजिलाधिकारी को रिपोर्ट दे दी. पत्रकार ने 23 मार्च 2013 को दोपहर में अपना जवाब दाखिल किया कि पुलिस द्वारा दर्ज कार्यवाही के तीनों मुकदमों में पुलिस ने खुद फाइनल रिपोर्ट लगाई है या वह न्यायालय से दोषमुक्त है. इस पर कोतवाल ने मकान मालिक विनोद गुप्ता व सुमित गुप्ता, निवासी काजीपुर रोड, भदोही को साजिश में लेकर रंगदारी मांगने की झूठी रिपोर्ट दर्ज कर दी. इतना ही नहीं, पुलिस ने पत्रकार के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्यवाही भी कर दी और बगैर मौका दिए जिलाधिकारी ने 9 अप्रैल 2013 को जिला बदर कर दिया. इस दौरान पुलिस व प्रशासन पत्रकार को मारने-पीटने व गिरफ्तार करने की धमकी देती रहा. इसी बीच उच्च न्यायालय, इलाहाबाद ने 20 मई को जिलाबदर की कार्यवाही पर रोक लगा दी.

इसके पूर्व 7 मई 2013 को जब गांधी गुण्डा एक्ट व जिलाबदर के चलते जनपद से बाहर थे तो मकान मालिक कमरे का ताला तोड़कर विज्ञापन के 1.5 लाख नगद, जेवर, जरूरी कागजात व तमाम साक्ष्य उठा ले गये थे. इसकी सूचना पत्रकार की पत्नी रश्मि गांधी ने कोतवाली से लेकर एसपी तक को दी, लेकिन रिपोर्ट नहीं लिखी गई. 30 मई 2013 को गांधी ने लूट का प्रार्थना पत्र तैयार कर पहली जून 2013 को सुबह सीजीएम न्यायालय में 156 (3) जाब्ता फौजदारी के अन्तर्गत याचिका दायर की और सुबह 10 बजे कमरे पर आकर अपनी मौसी के बेटे के शादी में शामिल होने के लिए कुछ कपड़े लेकर जीप से बनारस तथा वहां से बस से रांची के लिए चले गये. इस बीच सायंकाल 4 बजे उन्हें मोबाईल से सूचना मिली कि पुलिस की मौजूदगी में मकान मालिक आदि कमरे का ताला तोड़कर सामान उठा ले जा रहे हैं. इसकी सूचना तत्काल गांधी और उनकी पत्नी ने मोबाईल के जरिये कोतवाली व एसपी के अलावा शहर के तमाम संभ्रान्त नागरिकों को दी और ऐसा न करने व तोडफोड़ व लूटपाट रुकवाने की गुहार लगाई, लेकिन सुनवायी नहीं हुई. मकान मालिक विनोद गुप्ता व बिट्टू गुप्ता आदि ने उनकी शादी में मिले व 15 सालों की कमाई की सारी गृहस्थी कमरे में रखे दो कम्प्यूटर सेट, कैमरा, वीडियो कैमरा, आज तक लोगो, आलमारी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, रंगीन टीवी, पंलग, कपड़े व कमरों में रखे लगभग 20 लाख के कीमती सामान उठा ले गये. गांधी ने बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस उत्पीड़नात्मक मामले में डीएम, एसपी व कोतवाल समेत प्रमुख गृह सचिव को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है. इसके अलावा पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमों पर रोक लगा दी है.
    
 

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