पत्रकार के पिता पर हमला, शिकायत के बाद भी पुलिस मौन

: थानेदार उल्‍टे केस करवाने की धमकी देता है : यशवंत भैया, नमस्कार, मैं पंकज कुमार साव नवभारत, बिलासपुर में काम करता हूँ. पिछले महीने की पहली तारीख को मेरे पिताजी पर कुछ लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया था. जिस थानेदार ने पिताजी को हॉस्पीटल भिजवाया उसी ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार दिया. पुलिस के टाल-मटोल से तंग आकर थोड़ा स्वस्थ होने पर पिताजी ने एसपी और डीआईजी तक से गुहार लगाई, पर हुआ कुछ नहीं. ऊपर से थाना प्रभारी ने घटना को सांप्रदायिक रंग देते हुए उसे अपना कवच बना लिया.

अब समझौते के नाम पर बार-बार पिताजी को थाने पर बुलाता है, वहां समझौता भी नहीं करवाता और आरोपियों की और से भी केस करवा देने की धमकियाँ देता है. पिताजी की परेशानी और असमर्थता को देखते मैंने एक प्रार्थना पत्र गत 14 मई को डीजीपी को मेल किया एक सप्ताह तक कोई जवाब न आने पर दुबारा आज मेल किया है. नीचे वह प्रार्थना पत्र पेस्ट कर आपको मेल कर रहा हूँ. मेरी इस परेशानी क्या हाल हो सकता है, कृपया मार्गदर्शन करें.


सेवा में,

पुलिस महानिदेशक महोदय,

रांची, झारखंड 

विषय- सामूहिक जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज न करने के संबंध में.

महाशय,

मैं पंकज कुमार साव पेशे से पत्रकार हूं और वर्तमान में नवभारत, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में उप-संपादक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा हूं. विगत 01/04/2012 को दोपहर लगभग 2 बजे मेरे पिता श्री द्वारिका साव (पिता स्व. रामचरण साव, ग्राम- पीपरा, पोस्ट- सिंघरावां, थाना- चौपारण, जिला- हजारीबाग, झारखण्ड) पर केवला ग्राम के कमरुद्दीन खान पिता- इदरीश खान, सम्मी खान पिता- सद्दर खान, हलीम खान पिता- करीम खान, नईम खान, अफाक खान पिता- स्व. अजीज खान, जमील खान पिता- खलील खान, जफरूद्दीन खान पिता- गफ्फार खान, नजरूल खान पिता- गफ्फार खान, मोही खान पिता- स्व. गनी खान, लोहा खान पिता- हलीम खान ने सामूहिक रूप से सशस्त्र जानलेवा हमला कर दिया. वहां उपस्थित बेला ग्राम के लोगों ने किसी तरह उनकी जान बचाई, लेकिन फिर भी हमले में पिताजी (द्वारिका साव) बुरी तरह घायल हो गए. हमले के समय घटनास्थल पर उपस्थित स्थानीय विधायक सहित अनेक जनप्रतिनिधि व सैकड़ों ग्रामीण प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं.

02/04/2012 को पिताजी (द्वारिका साव) ने घटना की लिखित शिकायत चौपारण थाने में की. शिकायत के बाद उन्हें थाने की अनुशंसा पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, चौपारण में भर्ती कराया गया. प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सक ने अवस्था की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 3 अप्रैल को सदर अस्पताल, हजारीबाग रेफर कर दिया गया. इतना कुछ होने के बावजूद पुलिस द्वारा उक्त घटना पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. थाने से निराश पिताजी (द्वारिका साव) ने 11/04/2012 को पुलिस अधीक्षक, हजारीबाग से इसकी लिखित शिकायत की (Sl. No.-2098/ Dt. 11/4/12) . साथ ही इसी दिन एक आवेदन-पत्र पुलिस उप महानिरीक्षक, उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र के नाम भी उनके कार्यालय में जमा किया (Received Date- 11/04/2012).

घटना के करीब 2 महीने और एसपी तथा डीआईजी को आवेदन-पत्र के करीब डेढ़ महीने बाद भी अब तक पुलिस द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई की सूचना नहीं है. उक्त आरोपित अपराधी किस्म के लोग हैं. गाहे-बगाहे रंगदारी, मार-पीट आदि छोटी-बड़ी अपराधिक घटनाओं को अंजाम देना उनकी आदतों में शुमार है. घटना के बाद मेरा पूरा परिवार आतंक के साये में जी रहा है. पिताजी (द्वारिका साव) गरीब किसान हैं. उनकी शिक्षा-दीक्षा प्राथमिक स्तर तक ही हुई है. उनके लिए बार-बार पुलिस अधिकारियों के पास जाना, ईमेल से शिकायत दर्ज कराना, न्यायालय में मामले को ले जाकर मुकदमा लड़ना आदि कार्य अत्यंत कठिन हैं. बहुत व्यथित होकर न्याय की आस में मैंने एक प्रार्थना पत्र आपको गत 14 को ईमेल द्वारा प्रेषित किया था, पर अब आपकी और से कोई जवाब नहीं आने पर यह प्रार्थना-पत्र ईमेल द्वारा आपको दुबारा प्रेषित कर रहा हूं, साथ ही अस्पताल की पर्ची व अब तक दिए गए आवेदनों की 'स्कैन- प्रतियां' भी  पिछले बार की तरह प्रेषित कर रहा हूं. आपसे विनम्र निवेदन है कि इस संबंध में उचित कानूनी कार्रवाई का निर्देश संबंधित पुलिस अधिकारियों को दें.

संलग्न-
1. थाने में दिया गया आवेदन-पत्र
2. पुलिस अधीक्षक को प्राप्त आवेदन- पत्र
3 . पुलिस  उपमहानिरीक्षक को प्राप्त आवेदन-पत्र
4 . दोनों अस्पतालों की पर्चियां

आपका विश्वासी

पंकज कुमार साव

संपादकीय विभाग
 नवभारत प्रेस
 बस स्टैण्ड के पास
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
मो. न.- 09691010640
दूरभाष (कार्यालय)- 07752-230591

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *