पत्रकार को फोन पर धमकी देने वाला गिरफ्तार

: इस मामले में उदासीन बने रहे पत्रकार संगठन और थाने में भुक्‍तभोगी को ही धमकाता रहा दरोगा : ''हमारी सरकार बन गई है, सोच-समझकर खबरें लिखों नहीं तो गोली से उड़ा दिया जाएगा।'' मोबाइल पर एक पत्रकार को इस तरह की धमकी देने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर मामूली धारा में चालान कर दिया। इस पूरे मामले में इलाहाबाद पुलिस का रवैया जहां बेहद अफसोसजनक रहा, वहीं पत्रकारों का बिखराव भी देखने को मिला। ग्यारह मार्च को दोपहर करीब साढ़े ग्यारह बजे इलाहाबाद से प्रकाशित अमृत प्रभात के स्थानीय संवाददाता राकेश शुक्ला को मोबाइल पर जान से मारने की धमकी दी गई थी।

राकेश शुक्ला ग्रामीण पत्रकार एससोसिएशन के जिला संयुक्त मंत्री भी हैं। धमकी मिलने से परेशान राकेश शुक्ला ने पत्रकार साथियों को जानकारी देने के बाद स्थानीय थाने नवाबगंज में तहरीर दी। पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अफसरों को भी घटना की जानकारी नहीं दी। दो दिनों तक कोई कार्रवाई न होने पर स्थानीय पत्रकारों ने थाने पहुंचकर कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। इसके बाद यहां की पुलिस के कान में जूं रेंगी। मोबाइल सर्विलांस के जरिए पुलिस ने लाल गोपालगंज के दनियालपुर निवासी माबूद उर्फ जुम्मू को पकड़ा। उसके बाद भी नवाबगंज पुलिस का खेल चलता रहा। इस दौरान आरोपी युवक को थाने में बाकायदे सम्मान दिया जाता रहा, वहीं दूसरी तरफ थाने में भुक्तभोगी पत्रकार राकेश शुक्ला को चौकी इंचार्ज जय नारायण राय लगातार हड़काते-चमकाते रहे। इस दौरान कोई पत्रकार संगठन दूर-दूर तक नजर नहीं आए। अकेले पड़ गए पत्रकार का उत्पीड़न थाने में भी होता रहा।

खास बात यह है कि यहां कई पत्रकार संगठन हैं। सेमिनारों और बैठकों में भाषण के दौरान एकजुटता और संघर्ष के बारे में जमकर ‘जुगाली’ करने वाले संगठन के कई पदाधिकारी अपने काम-धंधे में ही व्यस्त रहे। कई पत्रकारों को तो इसी बहाने थानेदार से वफादारी निभाने का सुअवसर मिल गया। उधर, आरोपी युवक को पुलिस थाने लाई और सम्मान में कुर्सी पर बैठाया। उसकी बाकायदा खातिरदारी करने में नवाबगंज की पुलिस पीछे नहीं रही।

हद तो यह रही कि जिस मोबाइल से धमकी दी गई उस सेट को पुलिस ने कब्जे में भी लेना जरूरी नहीं समझा। थाने से लेकर एसडीएम कोर्ट तक आरोपी युवक उसी मोबाइल से लगातार अलग-अलग लोगों से बेधड़क तरीके से लंबी बातचीत करता रहा। सत्ता की हनक का ही यह असर रहा कि आरोपी के साथ आया एक सिपाही मूकदर्शक बना रहा। इस मामले में यहां के पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र भेजकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पत्र में हस्ताक्षर करने वालों में राजीव ओझा, शिवाशकर पांडेय, राम सजीवन मिश्र, सुरेंद्र प्रताप नारायण पांडेय, प्रदीप कुमार यादव, नागेश कुमार तिवारी, चंदन तिवारी, समाजसेवी राजमंगल दुबे आदि लोग हैं।

इलाहाबाद से पत्रकार शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.

 

 
 

 

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