पत्रकार नेता के. विक्रम राव और उनकी यूनियन की हकीकत

भारत की पत्रकारों की सबसे बड़ी यूनियन का दम भरने वाली इंडियन फेडरेशन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की कार्य प्रणाली को उजागर करना चाहूंगा. मैं स्वयं भुक्तभोगी हूँ. हाल ही में के. विक्रम राव जो कि कई वर्षों से इसके स्वयंभू अध्यक्ष बने हुए हैं, ने मध्य भारत के लिए कृष्ण मोहन झा को इंचार्ज और राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया.

इसके तत्काल बाद वे झा के पीछे पड़ गए कि भोपाल में कोई आयोजन करें और वहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल तथा अन्य गणमान्य नागरिकों से उनका परिचय करावें. बेचारे झा ने आयोजन की हामी भर दी और इसके लिए अपनी मित्र मण्डली को सजग किया.

पता चला कि राव साहब के आने-जाने और ठहरने का खर्च तथा उनके विभिन्न प्रांतों से जो लग्गू भग्गू आयेंगे उनका भी रहना ठहरना और खाने पीने का खर्च झा एंड कंपनी को उठाना होगा. झा बेचारा, मरता क्या न करता. उसने राव और उनके परिवार के लिए लखनऊ से भोपाल के 4 एयर टिकट और अन्य कुछ लोगों के लिए सेकेंड ए.सी. के रेलवे टिकट का इंतजाम किया.

ठहरने के लिए बीएचईएल के गेस्ट हाउस में 2 कमरे और एमएलए रेस्ट हॉउस में करीब 25 कमरे उनके लग्गू भग्गू के लिए बुक किये गए. इस आयोजन में करीब 4 लाख रुपये खर्च हुए. राव ने बीएचईएल गेस्ट हाउस के कमरों को रिजेक्ट कर दिया और न्यू मार्किट के एक बढ़िया होटल में ठहरे. लब्बोलुआब यह कि मुझे ऐसा लगा कि यह किसी यूनियन का कार्यक्रम न होकर कार्पोरेट हाउस का प्रोग्राम हो और राव का व्यवहार ठीक किसी कॉर्पोरेट हाउस के मालिक की तरह था. मेरा भी इस आयोजन में करीब सत्तर हजार रुपया लगा और बेचारे झा अभी तक बाकी बचे रुपयों को आज तक चुका रहे हैं.

भोपाल से रवींद्र पंचोली की रिपोर्ट.

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