पत्रकार पिटाई प्रकरण : लखनऊ के पत्रकारों, मुलायम-अखिलेश-शिवपाल को जगाओ

गोरखपुर में जो कांड हुआ है वह सपा के शासनकाल में काले धब्बे की तरह है. एक आईपीएस, जो एसएसपी के पद पर तैनात है, आपा खो बैठता है, सिर्फ इस बात पर कि इस पत्रकार की बाइक सड़क पर क्यों खड़ी है. बस, पत्रकार को बुलाया और पीटना शुरू कर दिया. आईपीएस आशुतोष ने पत्रकार को पीटते हुए पूछा कि बाइक पर प्रेस क्यों लिखा रखा है, तो पीड़ित ने बताया कि वह अमर उजाला में रिपोर्टर के पद पर काम करता है, यह सुनकर आईपीएस का दिमाग और ज्यादा खराब हो गया और लाठी निकालकर गिरा गिरा कर पीटना शुरू कर दिया.

भड़ास4मीडिया से बातचीत में पीड़ित रिपोर्टर धर्मवीर बताते हैं कि वे खुद स्तब्ध रह गए जब एक जिम्मेदार पद पर बैठे इतने बड़े पुलिस अधिकारी ने उनके साथ ऐसा बर्ताव किया. धर्मवीर के मुताबिक उनकी गाड़ी का वे चालान कर सकते थे, जब्त करा सकते थे, मुकदमा लिखा सकते थे, पर आप कानून को कैसे हाथ में ले सकते हैं, सरेआम किसलिए आप मुझे पीट सकते हैं. धर्मवीर का मोबाइल नंबर 09198964066 है. इस नंबर पर जब भड़ास4मीडिया ने उनसे बातचीत की तो उन्होंने अपने साथ हुए वाकये की पुष्टि की और दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की ताकि आगे फिर यह बददिमाग अफसर किसी पत्रकार तो क्या, किसी आम आदमी को बिना बात पीट न सके, इसे सबक जरूर मिले.

गोरखपुर के पत्रकार बेहद नाराज हैं. सब चाहते हैं कि एसएसपी आशुतोष के खिलाफ सख्स से सख्त कार्रवाई कर मुख्यमंत्री अखिलेश अपने उस वादे को निभाएं जिसमें उन्होंने सपा के राज में किसी निर्दोष को प्रताड़ित न किए जाने की बात कही थी. मायावती के शासनकाल में मीडिया वालों से लेकर आम खास हर कोई अफसरशाही की बददिमागी से पीड़ित परेशान था. सपा राज आया तो लोगों में उम्मीद जगी कि बुरा वक्त अब नहीं आएगा. सब बेहतर होगा. पर ऐसा न हो सका. मायावती के शासनकाल में भी ऐसा नहीं हुआ कि किसी प्रतिष्ठित अखबार के निर्दोष पत्रकार को किसी आईपीएस ने सरेराह पटक पटक कर सिर्फ इसलिए पीटा हो कि उसकी बाइक सड़क पर क्यों खड़ी है. पर यह कारनामा सपा के शासनकाल में हो गया. इसे कर दिखाने का रिकार्ड कायम किया है गोरखपुर के एसएसपी आशुतोष ने.

अब गेंद पत्रकारों के पाले में है. अगर वे न जगे तो कल किसी दूसरे जिले में कोई दूसरा पत्रकार ऐसे ही किसी दूसरे बददिमाग अफसर के हाथों पीटा जाएगा और उसका कुछ न बिगड़ेगा. इसलिए जरूरी है कि लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार, प्रेस संगठन, पत्रकार एसोसिएशन… सभी लोग मिलकर अपना अपना विरोध निंदा प्रदर्शन धरना आंदोलन मांग शुरू करें, सामने लाएं, खुलकर रखें ताकि आवाज सीएम अखिलेश से लेकर उनके संरक्षक व पिता मुलायम और परिजन व ताकतवर मंत्री शिवपाल तक पहुंचे, ये लोग नींद से जगें. कुछ ही महीने हुए सपा के सरकार आए और इस तरह की हरकत होने लगी. कहां गया शिवपाल का वो वादा जिसमें उन्होंने कहा था कि सपा के शासनकाल में मीडिया वालों व उनके परिजनों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा और अगर किसी अफसर ने ऐसी गुस्ताखी की तो उसे दंडित किया जाएगा. शिवपाल को अपना वादा निभाना चाहिए और आईपीएस आशुतोष को दंडित करने की दिशा में पहल करते हुए तुरंत सस्पेंड कराना चाहिए.

गोरखपुर के सभी अखबारों के संपादकों से अनुरोध है कि वे इस मुद्दे पर अपने प्रबंधन या किसी अफसर या किसी नेता के दबाव में न आएं. संपादक लोग सबको साफ साफ बता दें कि यह ऐसा मामला है जिसमें अगर न्याय नहीं हुआ तो कल को वे लोग भी इसी तरह पीटे जाएंगो तो कौन साथ देगा. भड़ास4मीडिया इस मामले में अपनी तरफ से हर वो कोशिश करेगा जिससे दोषी अफसर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो सके. आईपीएस आशुतोष ने एक निर्दोष पत्रकार पर हाथ उठाकर अपना काम कर चुके हैं, अब कलम वालों को अपनी कलम उठाने की जरूरत है, एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत है ताकि देश में लोकतंत्र कायम रह सके, पत्रकारों को अपना काम करने के लिए बेखौफ माहौल कायम रह सके.

भड़ास की तरफ से एक ब्लैक बैकग्राउंड में एक पोस्टर तैयार किया गया है, जिसे सभी लोग अपने अपने ब्लाग, फेसबुक, ट्विटर आदि पर अपलोड करें जिससे यह बात हर कहीं पहुंच सके और अपने पीड़ित पत्रकार साथी को न्याय दिलाया जा सके.

यशवंत
एडिटर
भड़ास4मीडिया

bhadas4media@gmail.com


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