देश में चुनाव चल रहे हैं। हरियाणा में 10 सीटों पर चुनाव हो चुके हैं। ऐसे में पत्रकारों व नेताओं का प्रेम भी बढ़ जाता है। कारण यह है कि अखबारों में नेताओं को अपनी खबर चाहिए। विभिन्न अखबारों द्वारा समाचार प्रकाशित करने की आड़ में मोटे-मोटे पैकेज नेताओं के लिए शुरू कर दिए। हर अखबार अपनी प्रसार संख्या के अनुसार पैकेज लिए। लेकिन कुछ नेताओं ने पैकेज देने की बजाए पत्रकारों को व्यक्तिगत रूप से ओबलाइज किया।
इसका फायदा उठाया लोकसभा चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशियों व पत्रकारों के बीच में सेतु का काम करने वाले कुछ पत्रकारों ने। इन पत्रकारों के लिए चुनाव किसी उत्सव से कम नहीं होता। भिवानी में भी ऐसा ही हुआ। भिवानी से एक राष्ट्रीय पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी की तरफ से कुछ पत्रकारों को पैकेज तो कुछ को महंगे गिफ्ट उपलब्ध करवाएं गए। इसकी मध्यस्थता की एक पत्रकार ने, जो कि इन प्रत्याशी का काफी करीबी माना जाता है और पिछले कई वर्षों से इनके पीआरओ का काम भी देख रहा है। इन पत्रकार महोदय ने गिफ्ट की सूची में तो कई पत्रकारों के नाम डाल दिए, लेकिन उनको गिफ्ट भेजने की बजाए अपने चहेते पत्रकारों को ही गिफ्ट दिए।
पत्रकार ने उन कथित पत्रकारों को भी गिफ्ट दे दिए जोकि सरकारी नौकरी करते हैं और न्यूज चैनल्स में भी खबरें भेजते हैं। गिफ्ट से वंचित पत्रकारों को जब पता चला तो उन्होंने लामबंदी शुरू कर दी और प्रत्याशी तक अपनी बात पहुंचाई। इससे उन पत्रकारों में काफी रोष है,जोकि उस प्रत्याशी की खबर तो प्रमुखता से लिखते हैं, लेकिन उन तक गिफ्ट नहीं पहुंचा।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






