वाराणसी। मवैया निवासी पत्रकार भावेश पांडेय हत्याकांड में पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर एसएसपी ने थानाध्यक्ष समेत छह सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सोमवार को आईजी जीएल मीणा ने घटनास्थल का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने भी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही।
आईजी के निर्देश पर पत्रकार हत्याकांड में पुलिस की भूमिका की खुद एसएसपी ने जांच शुरू की। उन्हें पता चला कि भावेश के पिता तारकनाथ पांडेय की 20 साल पहले मौत हो गई थी। सावित्री के दो बेटे कोलकाता में ढाबा चलाते हैं। छोटा भावेश मां के साथ रहता था। विवाद की शुरुआत 28 दिंसबर 2012 को पत्रकार की चहारदीवारी सेंट्रल जेल के सिपाही परिवार द्वारा गिराने पर हुई। इस मामले में तहरीर देने पर जैनेंद्र पांडेय, आनंद पांडेय, दुर्गेश दूबे और कृष्ण कुमार उपाध्याय के विरुद्ध एनसीआर दर्ज हुआ था। एसडीएम सदर ने पैमाइश के बाद बताया था कि जमीन सावित्री की है। उन्होंने सारनाथ थानाध्यक्ष को विपक्षियों का कब्जा रोकने का निर्देश दिया था पर थानाध्यक्ष ने कब्जा रोकने की जगह जमीन को विवादित करार देते हुए धारा 145 के तहत कार्रवाई करने की रिपोर्ट भेज दी।
आईजी ने इस मामले में थानाध्यक्ष को सवालों के घेरे में खड़ा किया, जबकि एसएसपी ने थानाध्यक्ष तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। चर्चा थी कि इस मामले में सिपाहियों ने विपक्षियों से पैसे का लेनदेन किया था। इसी आधार पर बीट के पांच सिपाही नेपाल सिंह, आफताब आलम, लालजी यादव, संतोष कुमार मिश्रा और लक्ष्मण प्रसाद को भी निलंबित कर दिया गया। दूसरे पक्ष के कृष्णावतार उपाध्याय ने बताया कि इसी जमीन को 1995 में उसके मामा ने वसीयत की थी। इसी आधार उसने जमीन पांच लाख रुपये में जैनेंद्र को रजिस्ट्री कर दी थी। जांच से पता चला कि रजिस्ट्री बगैर पैसे के की गई थी। जमीन छुड़ाकर उसका आपस में बंटवारा करने के लिए यह नाटक किया गया था। सिविल न्यायालय ने रजिस्ट्री को पिछले वर्ष ही अवैध घोषित कर दिया था। (अमर उजाला)






