पत्रकार ये नहीं बताते देश की जनता के लिए उन्होंने कितने घोटालों का पर्दाफाश किया

Deepak Sharma : Mr X… reporting from On board PM's aircraft….  जब देश आंतरिक समस्याओं से जूझ रहा हो तब आंतरिक सुरक्षा की बीट कवर कर रहे पत्रकारों को ग्रह मंत्रालय की रिपोर्टिंग करनी चाहिए या ग्रह मंत्री की? जब देश आर्थिक घोटालों/समस्याओं से जूझ रहा हो तब फाईनेंस की बीट पर काम कर रहे पत्रकारों को वित्त मंत्रालय के चक्कर काटने चाहिए या वित्त मंत्री के?

जब समूचे देश की गाडी पटरी से उतर रही हो तब शीर्षस्थ पत्रकारों को प्रधानमंत्री के विमान में बैठकर सातवें आसमान से खबर करनी चाहिए या प्रधानमंत्री के कार्यालय की बंद अलमारियों से खबर निकालनी चाहिए?

अक्सर अपनी उपलब्धियां गिनाते समय बड़े पत्रकार अपने बायो-डाटा में लिखते है कि वो देश के प्रधानमन्त्री के साथ कितनी विदेश यात्राओं को कवर करने गए ? वो कितनी बार राष्ट्रपति के साथ अन्तराष्ट्रीय सम्मेलनों में गए ? अपने बायो-डाटा में ऐसे पत्रकार ये नहीं बताते की देश की जनता के लिए उन्होंने कितने घोटालों का पर्दाफाश किया. उन्होंने जनता की गाढ़ी कमाई के दुरपयोग की कितनी ख़बरें ब्रेक की . वो कितनी बार सरकार और सरकारी ओहदेदारों से गरीब के हक के लिए भिडे ?

मित्रों अफ़सोस इस बात का है कि सरकार के हमराज़/हमसफ़र ऐसे पत्रकारों को अखबार और चैनलों के कुछ मालिक ना सिर्फ महत्व देते हैं बल्कि बहुत से लोग ऐसे ही पत्रकारों को बड़ा मानने लगे है . लेकिन इस सिलसिले को अब तोडना होगा ….मै नही चाहता कि घोटाले/घपले/खुलासे आज कोई अदालत में लगी याचिका या कैग की रिपोर्ट के ज़रिये हो …बल्कि ऐसे खुलासे देश के सभी नामी गिरामी पत्राकारों को करने चाहिए जिनकी सत्ता और सरकार में हर जगह पहुँच है. वो इस पहुँच के ज़रिये जनता के हित की ख़बरें करे ना की इस पहुँच से वो अपना और अपने अखबार का हित साधें .

सौ खुलूस बातों में ..सब करम ख्यालों में
बस ज़रा वफ़ा कम है नामवर पत्रकारों में

आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार दीपक शर्मा के फेसबुक वॉल से.

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