पत्रकार व नेता हैं सस्ती लोकप्रियता के माध्यम : अनीस

: जहांगीराबाद में बिना मान्यता और सम्बद्धता के चल रहा है मीडिया इंस्टीट्यूट : बाराबंकी। जिला मुख्यालय से मात्र 8 किलोमीटर दूर जहांगीराबाद में मीडिया इंस्टीट्यूट का सृजन कर पत्रकारिता सिखाने का गोरखधंधा लगभग दस वर्षों से चल रहा है। सरकार, शासन, प्रशासन, नेता, और पत्रकार खामोश बने हैं। एक सेमिनार के नाम पर ग्राम्य विकास मंत्री अरविन्द सिंह गोप और एनडीटीवी के रिपोर्टर कमाल खान व अमर उजाला के एसोसिएट एडीटर को बुलाया गया। भाषणबाजी करायी गयी, बाद में जब डायरेक्टर अनीस से बात हुई तो उनका कहना था कि पत्रकार और नेता सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए बुलाये जाते हैं और यह ढोल पीटने वाला काम करते हैं। एक माला में अच्छा प्रचार मिल जाता है।

जहांगीराबाद में तकरीबन एक दशक से प्राचीन किले को सजा धजाकर शिक्षण संस्थान में परिवर्तित कर दिया गया है। जहांगीराबाद मीडिया इंस्टीट्यूट के नाम पर दूरदराज के छात्र-छात्राओं को यहां प्रवेश करने का नाटक रचा गया। छात्रों की संख्या तो कुछ नहीं हुई लेकिन अब इसका प्रचार कैसे हो इसके लिए दिल्ली से ले करके लखनऊ के राजधानी तक के पत्रकारों को बुलाने और गिफ्ट व नगद की सेवा देकर सम्मानित कर मीडिया इंस्टीट्यूट का गोरखधंधा जग जाहिर है।

शिक्षा संस्थान में सेमिनार व्याख्यान, संगोष्ठी आदि के नाम पर स्थानीय पत्रकारों और नेताओं को आमंत्रित किया जाता है। धारणा यह है कि नेता और पत्रकार के आने पर संस्थान का ओछा मकसद पूरा होगा और सस्ती लोकप्रियता भी हासिल होगी। यह संस्थान न तो किसी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है न ही इस संस्थान से शिक्षा प्राप्त किये छात्र की उपाधि मान्य है। संस्थान में कार्यरत कर्मियों और अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर पत्रकारों को आमंत्रित करना और नेताओं से किसी कार्यक्रम का उद्घाटन कराने पर एक तीर से उनके दो निशान पूरे होते हैं। नेता के आने से पत्रकार आते हैं और कुछ बड़े पत्रकार के आने से उनके संस्थान की ओर से की जा रही कथित सकारात्मक गतिविधियां बहुसंख्यक लोगों के बीच पहुंच जाती है।

इसी तरह का प्रयोग बीते वर्षों से चल रहा है। रविवार को संस्थान में पत्रकारिता पर सेमिनार आयोजित किया गया। जहांगीराबाद ट्रस्ट के निदेशक अनीस से जब टेलीफोन पर वार्ता हुई तो उनका कहना था कि कि पत्रकारिता प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम की मान्यता के लिए अवध विश्वविद्यालय में आवेदन किया गया है। जिसकी अगले सत्र में स्वीकृत होने की संभावना है। वह यह बताने में असमर्थ रहे कि अन्य पाठ्यक्रमों की मान्यता और संस्थान की सम्बद्धता की क्या स्थिति है। उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं को और वरिष्ठ पत्रकारों और सम्पादकों को बुलाने के पीछे सिर्फ एक मकसद है। जैसे ढोल पीटना और बम-बम करना। इनको बुलाया जाता है, फूल माला पहनाया जाता है, अखबार में खबर छपती है। और यह एक पब्लीसिटी का माध्यम बनते हैं। वैसे तो इसको चीप पब्लीसिटी कहा जायेगा।

उन्होंने कहा कि वहां से सपोर्ट नहीं मिल रहा है जिसकी वजह से मीडिया इंस्टीट्यूट की मान्यता नहीं हो पायी है। उन्होंने उर्दू चैनल का इमामे हरम से उद्घाटन के जवाब में कहा कि 6 महीने तक परेशान होने के बाद ऐसा यूपी का कानून है कि जिसमें करोड़ों रुपये जमा करने पड़ेंगे तभी यह चैनल शुरू हो पायेगा। इसलिए यह मामला अब खामोश है। आज हुए कार्यक्रम में प्रदेश के मंत्री अरविन्द सिंह गोप एक लोकप्रिय समाचार पत्र के एसोसिएट एडीटर तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया के बड़े ओहदेदार सम्मिलित हुए। छात्रों के नाम पर यहां मामला सिफर रहा।

लेखक रिजवान मुस्‍तफा बाराबंकी के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं.

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