पत्रकार संजय शर्मा ने यूपी सरकार को आइना दिखाया, नौकरशाही में हड़कंप

अब तक जिस प्रदेश सरकार ने दागी नौकरशाहों को मलाईदार पदों पर बैठाकर अपना आंख-कान सब बंद कर रखा था, अचानक उसे एक पत्रकार ने आइना दिखा दिया है. वीकएंड टाइम्‍स के संपादक संजय शर्मा की याचिका पर कोर्ट के आदेश के बाद यूपी की नौकरशाही में हड़कम्‍प मच गया है. आदेश के बाद आनन-फानन में अधिकारियों को इधर से उधर किया गया. हालां‍कि सरकार एवं उनके अधिकारियों ने याचिका खारिज करवाने के लिए अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर रखी थी, परन्‍तु संजय शर्मा के अधिवक्‍ता अशोक पांडेय के तर्क के आगे सरकारी वकीलों के तर्क फीके पड़ गए.

पत्रकार संजय शर्मा ने निचली अदालत से सजा मिलने के बाद हाई कोर्ट से इस पर स्‍थगन आदेश पाए राजीव कुमार को दुबारा प्रमुख सचिव नियुक्ति बनाए जाने के मामले में कोर्ट में चुनौती दी थी. संजय कुमार ने याचिका के माध्‍यम से मांग की थी कि जब दो साल की सजा पाए सांसद-विधायक को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता है तो फिर राजीव कुमार को कैसे नौकरी करने दी जा रही है और वो भी इतने महत्‍वपूर्ण पद पर.

संजय शर्मा ने राजीव कुमार को बर्खास्‍त करने की भी मांग की है. इसी मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस उमानाथ सिंह और बीके दीक्षित के बेंच ने इस नियुक्ति पर  राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है. न्यायालय की कठोर टिप्‍पणी के बाद सरकार से लेकर नौकरशाही में हड़कंप मच गया. कोर्ट से नोटिस मिलने के कुछ घंटों के भीतर नोएडा के सीईओ संजीव शरण, जिन्हें हटाने के निर्देश कोर्ट ने काफी पहले दिए थे, को हटा दिया गया.

मजे की बात यह है कि 17 जनवरी से यूपी में 6 साल बाद आईएएस वीक मनाया जा रहा है. प्रदेश भर से सभी डीएम, कमिश्नर लखनऊ में इकट्ठा हुए हैं. वीक की शुरुआत से पहले ही संजय शर्मा की रिट ने इन अफसरों के मुहँ का जायका ख़राब कर दिया है. वीकएंड टाइम्स प्रदेश का पहला अखबार था, जिसने राजीव कुमार को प्रमुख सचिव नियुक्ति बनाए जाते ही खबर छापी थी कि उनके खिलाफ सीबीआई की जांच चल रही है, लिहाजा उन्हें प्रमुख सचिव नियुक्ति नहीं बनाया जाना चाहिए.

इसके कुछ दिन बाद ही नीरा यादव के साथ राजीव कुमार को भी तीन साल की सजा हो गई. इसके बाद सरकार ने उन्हें हटा दिया, मगर हाई कोर्ट से सजा के फैसले पर स्टे मिलते ही उन्‍हें फिर से इसी पद पर तैनात कर दिया गया. संजय शर्मा ने एक बार अपने अखबार के माध्‍यम से इस खबर को उठाया, परन्‍तु सरकार पर कोई असर ही नहीं हुआ.

इसके बाद कानूनी डिग्री हासिल किए संजय शर्मा ने कोर्ट का सहारा लेकर न केवल एक साहसिक पहल की बल्कि अपने पत्रकारीय दायित्‍व का भी निर्वहन किया. उन्होंने राजीव कुमार को इस पद से हटाने की जगह उन्हें सेवा से बर्खास्त किये जाने की मांग की. इस याचिका के दायर होते ही सरकार में हड़कंप मचा और सरकार के पैरोकार सक्रिय हो गए. सूत्रों का कहना है कि एक दर्जन से ज्‍यादा आईएएस अधिकारियों ने संजय शर्मा को विभिन्‍न तरीके से प्रभावित करने की कोशिश की, परन्‍तु उन्‍हें कामयाबी नहीं मिल पाई.

सूत्रों ने बताया कि इस याचिका को खारिज करवाने के लिए सरकारी वकीलों ने सर्विस मामलों के जाने माने अधिवक्‍ता कालियाजी से भी सलाह मशविरा किया. परन्‍तु कोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए सरकार को नोटिस जारी कर दिया. मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी. इस रिट से संजय शर्मा ने यह भी दर्शा दिया कि पत्रकार खबर लिखने, पत्रकारिता करने के साथ-साथ अगर कानून का भी सहारा ले तो कई चीजो में  सुधार हो सकता है . इस साहसिक पहल पर संजय शर्मा को बधाई देने के लिए उनके मोबाइल नंबर 9452095094 पर काल कर सकते हैं.

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