पत्रकार हरीशचंद्र बर्णवाल की कहानियों का संग्रह ‘सच कहता हूं’ लोकार्पित

वरिष्ठ टीवी पत्रकार हरीश चंद्र बर्णवाल की कहानियों का संग्रह “सच कहता हूं” को देश की की जानी मानी हस्तियों ने मंगलवार को लोकार्पण किया। ये लोकार्पण समारोह दिल्ली से सटे फिल्म सिटी के मारवाह स्टूडियो में किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जहां राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष सुश्री ममता शर्मा थीं। वहीं वरिष्ठ लेखक और हंस के संपादक राजेंद्र यादव, मशहूर लेखिका मैत्रेयी पुष्पा, आज तक न्यूज चैनल के न्यूज डायरेक्टर कमर वाहिद नकवी, आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष, न्यूज 24 के मैनेजिंग एडिटर अजित अंजुम, महुआ के ग्रुप एडिटर राणा यशवंत, आज तक के वरिष्ठ एंकर सईद अंसारी, सीनियर आईपीएस अफसर और दिल्ली के ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस तेजेंदर लुथरा और बच्चों के मशहूर डॉक्टर रवि मलिक ने भी शिरकत की। कार्यक्रम के मॉडरेटर रहे मारवाह ग्रुप के डायरेक्टर संदीप मारवाह।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने हरीश चंद्र बर्णवाल की लेखनी की तारीफ करते हुए कहा कि कहानियों में उनका किसी भी मुद्दे को लेकर चित्रण काबिले तारीफ है। ममता ने बताया कि हरीश ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठाया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि लेखक हरीश आगे भी कहानियों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों से जुड़ी दिक्कतों को उठाते रहेंगे। किताब के लोकार्पण के बाद वरिष्ठ लेखक राजेंद्र यादव ने हरीश की जमकर तारीफ की। यादव ने “यही मुंबई है” और “चौथा कंधा” कहानियों का जिक्र करते हुए कहा कि ये कहानियां उपेक्षित बालक की निगाह से लिखी गई हैं। हरीश की ताकत ये है कि वो कहानियों को विजुअलाइज करते हैं। मशहूर लेखिका मैत्रेयी पुष्पा ने बताया कि हरीश की कहानियों को पढ़कर एक नई सोच मिली। जिंदगी को देखने का नया नजरिया मिला। मैत्रेयी ने हरीश की कहानी “काश मेरे साथ भी बलात्कार होता” के कुछ हिस्से पढ़कर सुनाए।

आज तक के न्यूज डायरेक्टर कमर वाहिद नकवी ने कहा कि हरीश बर्णवाल की कहानियां चौंकानी वाली हैं। वहीं IBN7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष ने “काश मेरे साथ बलात्कार होता” और “चौथा कंधा” कहानी के कुछ चौंकाने वाले हिस्से पढ़कर सुनाए। साथ ही ये भी कहा कि मीडिया से जुडी हुई कुछ कहानियां मीडियाकर्मियों की आंखें खोलने के लिए काफी हैं। आशुतोष ने मीडिया पर कटाक्ष करती हुई कहानी “तीन गलतियां” भी लोगों को पढ़कर सुनाईं और कहा कि ये कहानियां मन मस्तिष्क को हिला देने वाली रहीं। सीनियर आईपीएस अफसर तेजेंद्र लुथरा और महुआ चैनल के ग्रुप एडिटर यशवंत राणा ने भी किताब की जमकर तारीफ की। यशवंत ने कहा कि जो लोग सोचते हैं कि टीवी के लोगों को कुछ नहीं आता या फिर संवेदनशील नहीं होते, उनके लिए हरीश चंद्र बर्णवाल की किताब एक करारा जवाब है।

कार्यक्रम के अंत में  लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल ने बताया कि जब-जब जीवन की गंभीर दिक्कतों ने उन्हें परेशान किया, उस पर लगातार मेहनत करते, उन परेशानियों को करीब से समझने की कोशिश की और आखिरकार बरसों की मेहनत के बाद ही ये कहानियां लिखी गईं। इसीलिए उन्होंने 20 सालों में सिर्फ 6 कहानियां और चंद लघुकथाएं लिखी हैं।

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