पत्रकार हेमचंद्र की हत्या के बाद अब हेम मिश्रा की गिरफ्तारी से सरकार जनपक्षधर लोगों में दहशत पैदा करना चाहती है

Shahnawaz Malik : हेम मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद मैं हिन्दुस्तान में छपी उस ख़बर को दोबारा पढ़ना चाह रहा था जिसे Abhishek Srivastava ने अपनी वॉल पर लगाया था। ख़बर का शीर्षक था- 'नक्सलियों से सहानुभूति रखने वालों को हो सकती है जेल'। ख़बर को मैंने भी शेयर किया था लेकिन अब दोनों जगह से गायब है। सरकार की ये परोक्ष धमकी अख़बार में शायद कई बार छपी, लेकिन जब खबर की उस कतरन को सोशल मीडिया में लाकर सवाल किया गया तो गायब कर दी गई।

सबको पता है कि सरकार, उसकी नीतियों और कारगुज़ारियों की आलोचना करने वाले सर्विलांस पर हैं। उनका अकाउंट ट्रैक किया जा रहा है, फोन टैपिंग हो रही है, वगैरह-वगैहर। और मौक़ा मिलते ही सरकार ऐसे लोगों को जेल में डाल देती है। हेम मिश्रा की गिरफ्तारी उसी कड़ी का एक हिस्सा है और उनके प्रॉमिनेंट नक्सल कुरियर होने के पीछे का पूरा सच भी। लोग इस देश को दुनिया की सबसे बड़ी जम्हूरियत मानते हैं जबकि यहां क़ाबिज़ तानाशाही हुकूमत अपने ही नागरिकों को जेल में डाल रही है। अल्लाह बचाए ऐसी जम्हूरियत से जहां कविता, गीत-संगीत, बैठक पर शक की सुई घूमाई जा रही है, पाबंदी लगाई जा रही है और छात्र, पत्रकार, संस्कृतकर्मियों को जेल में ठूंसा जा रहा है। इस अनोखे देश के लिए प्रेम आपके मन में कितने हिलकोरे लगाए, लेकिन मैं सचमुच इससे हर दिन डिसकनेक्ट होता जा रहा हूं। पत्रकार हेमचंद्र पांडेय की हत्या के बाद हेम मिश्रा की गिरफ्तारी से सरकार ऐसे लोगों में दहशत पैदा करना चाहती है, लेकिन दहशत असल में गुस्से की शक्ल में तब्दील हो रही है।

पत्रकार शाहनवाज मलिक के फेसबुक वॉल से.

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