पत्रकार हो तो ऐसा, खबर का असर न होने पर पुरस्कार लौटा दिया

पणजी । गोवा की राजधानी से 70 किलोमीटर उत्तर टेरेखोल गांव में विवादास्पद गोल्फ कोर्स परियोजना को जारी रखने के गोवा सरकार के निर्णय ने मीडिया बिरादरी में एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। एक मराठी अखबार के पत्रकार ने खोजी पत्रकारिता के लिए मिले पुरस्कार को यह हवाला देते हुआ लौटा दिया कि "उसकी खबर जमीनी हकीकत पर वाजिब असर पैदा करने में नाकाम रही।"

मराठी दैनिक के मुख्य संवाददाता किशोर नायक गांवकर ने कहा कि श्रृंखलाबद्ध खोजपूर्ण लेख 'टेरेखोल गांव को बेचने की साजिश' के लिए उन्हें लैम्बर्ट मैसकैरेनहैस पुरस्कार मिला था।गांवकर ने कहा, "मैंने इस पुरस्कार को गोवा पत्रकार संघ को लौटा दिया, क्योंकि उनकी लिखी खबर टेरेखोल गांव को न्याय दिलाने में नाकाम रहा। एक नाकाम खबर पुरस्कार के काबिल नहीं होती।"

गोवा के प्रथम अंग्रेजी दैनिक अखबार 'द नवहिंद टाइम्स' के प्रथम संपादक लैम्बर्ट मैसकैरेनहैस के सम्मान में इस पुरस्कार का गठन किया गया था। गौरतलब है कि एक प्रमोटर ने टेरेखोल में प्रोफेशनल गोल्फ एसोसिएशन (पीजीए) स्थापित करने के लिए समूचे गांव को खरीद लिया था। गांव के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया था। गांवकर ने कहा कि गोवा सरकार ने पांच अप्रैल के अपने एक निर्णय में गोल्फ कोर्स परियोजना को 'पारिस्थितिकी पर्यटन परियोजना' का दर्जा दिया है। यह साबित करता है कि विरोध का कोई असर नहीं हुआ।

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