पत्र-पत्रिकाओं और टीवी चैनलों में तरुण तेजपाल टाइप पत्रकारों और संपादकों की लंबी कतार मौजूद है

Mukesh Kumar : तहलका के प्रमुख संपादक ने जो कुछ किया है उसके लिए उतना काफी नहीं है जिसे वे प्रायश्चित मानकर कर रहे हैं। माफी माँग लेना या छह महीने के लिए संपादकी छोड़ देना कतई पर्याप्त नहीं है और न ही इस तरह की दुर्घटनाओं का कोई समाधान ही। ऐसे तो हर कोई बच निकलेगा। सवाल एक अपराध का है और ऐसे अपराध का है जिसे कानूनी प्रक्रिया को पूरे किए बिना भुला देना ख़तरनाक़ होगा। कानूनी कार्रवाई इसलिए भी ज़रूरी है कि पत्र-पत्रिकाओं और टीवी चैनलों में ऐसे पत्रकारों और संपादकों की लंबी कतार मौजूद है।

कुछ संस्थान तो इसके लिए कुख्यात हैं और वहाँ खुद मालिक महिलाकर्मियों के शोषण में मुब्तिला रहे हैं। ये लोग इस तरह की हरकतें करते रहते हैं और कभी पीड़ितों में हिम्मत की कमी की वजह से तो कभी प्रबंधन के रवैये की वजह से बच जाते हैं। एक मिसाल कायम होनी ज़रूरी है ताकि इस तरह के अपराध करने की मानसिकता रखने वालों में ख़ौफ़ पैदा हो और वे ऐसा कुछ करने से बाज़ आएँ। महिला कर्मियों का हौसला बढ़ाने के लिए तो ये और भी ज़रूरी है।

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से. इस स्टेटस पर आईं कुछ टिप्पणियां यूं हैं…

    Sundeep Dev पीड़ित पत्रकार ने शोमा चौधरी के दावे का खंडन किया है। उन्होंने हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ से बातचीत में कहा कि वह तहलका की प्रतिक्रिया से निराश हैं। वह चाहती हैं कि तहलका को यौन शोषण के आरोप की जांच के लिए एक समिति बनानी चाहिए। पीड़ित महिला पत्रकार ने यौन दुर्व्यवहार की शिकायत करते हुए ईमेल में कहा है, 'तेजपाल ने जो किया है वह एक बुरा फैसला या परिस्थिति का ठीक से आकलन नहीं कर पाने का मामला नहीं है बल्क यौन दुर्व्यवहार का गंभीर मामला है। उन्होंने कहा,'हाल में गोवा में संपन्न थिंक फेस्टिवल में तेजपाल में मेरे कपड़े उतारने और दो बार मुझे जबर्दस्ती सहलाने की कोशिश की।

    Love Vyas तो कानूनी कार्रवाई शुरू करने से किसने किसे रोका है। तरूण ने जो निृणय लिया वो उनका है, कानूनी नहीं और ना ही उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश की।

    Rajnikant Gupta ना जाने महिलाओं का शोषण कब रुकेगा और कब नए युवा पत्रकारों को मौका मिलेगा आज शर्म आती है जब ऐसे वरिष्ट पत्रकार हरकत करते है अब तो मीडिया की शाख पर भी आच आ गई है …

    Asif Khan सर आपकी बात सही है। मगर जिद्के खिलाफ अपराध(यौन) हुआ है उसे क़ानून के पास जाना होगा। फिर उसे ये भी साबित करना होगा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ इलज़ाम उसने लगाया है वो अपराधी है। ऐसे दौर में जहाँ बेशर्मी इतनी बढ़ गयी कि लोग सबूतों के होते हुए भी अपने गुनाह से साफ़ मुकर जाते हैं और महिलाओं को ही नैतिकता का पाठ पढ़ाने लगते है, तरुण तेजपाल के इस कदम की सराहना तो करनी ही चाहिए। बाक़ी कानून को अपना भी करना चाहिए।

    Nikhil Anand मिडिया, जुडिशियरी इन सबको लेकर अक्षुण्णता का सिद्धांत पूरी तरह से खारिज हो चुका है। इन दोनों में मौजूद सामंती मठाधीश हर तरह की अय्याशी करते आ रहे हैं। इन दोनों सत्ता प्रतिष्ठानों में समान न्याय और भागीदारी के सिद्धांत को लागू करना अति-आवश्यक हो गया है।

    Asif Khan इतिहास साक्षी है सत्ता को हवस के पुजारियों ने अपनी काम वासना का जरिया बना कर कितनी ही मासूम और मजबूर महिलाओं की अस्मत को रौंदा है। आज के दौर में ये मठाधीश समानांतर सत्ता के भागिदार बन कर भेडिये बने हुए हैं।

    Rajesh Priyadarshi bilkul sahi

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