‘परंपरागत मीडिया के लिए सोशल मीडिया बड़ी चुनौती’

शिमला। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण आज परंपरागत मीडिया काफी दबाव में आ गया है। सोशल मीडिया में सूचनाओं का संप्रेषण बहुत तेज गति से होने के कारण पाठकों को समाचारपत्र एवं पत्रिकाएं बासी लगने लगे हैं। मीडिया की कमान प्रोफेशनल लोगों के हाथों से छिटक कर आम जनता के हाथों में आ गई हैं और इसके सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों पहलू हैं…। पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के शिमला चैप्टर की ओर से राष्ट्रीय जन सम्पर्क दिवस के अवसर पर आयोजित परिचर्चा में विद्वानों ने यह जुमले बार-बार दोहराए।

सोशल मीडिया के बारे में इन्फोर्मेशन एक्सप्लोजन और क्रांतिकारी मीडिया जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया। परिचर्चा का विषय था- 'सोशल मीडिया का बढ़ता महत्व : जन सम्पर्क की भूमिका'। परिचर्चा की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार पीसी लोहुमी ने की, जबकि टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार एवं वैब न्यूज़पोर्टल हिलपोस्ट.कॉम के संपादक रविंद्र मखैक और ट्रिब्यून के सहायक संपादक दिनेश कुमार मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन पीआरएसआई के शिमला चैप्टर के अध्यक्ष एवं हिमाचल प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पूर्व निदेशक बीडी शर्मा ने किया।

अध्यक्षीय भाषण में वरिष्ठ पत्रकार पीसी लोहुमी ने कहा कि सोशल मीडिया आज एक क्रांति बनकर उभरा है, जिसके सकारात्मक के साथ-साथ नकारात्मक पहलू भी हैं। आवश्यकता इस बात की है कि समुचित योजना और शोध के साथ समाजहित में इसके सकारात्मक लाभों का दोहन किया जाए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आगामी दस वर्षों में पूरे विश्व का प्रमुख मीडिया बनकर उभरने वाला है। इसलिए हमें इसके साथ चलना ही होगा।

उन्होंने कहा कि मीडिया और जन सम्पर्क व्यवसायियों दोनों के लिए सोशल मीडिया बराबर का महत्व रखता है और इसका बेहतरीन उपयोग सुनिश्चित बनाने के लिए नियमित, उचित और सही सूचना के सम्प्रेषण पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता से जुड़े अधिकांश लोग आज सूचना के लिए इंटरनेट पर निर्भर होते जा रहे हैं और शोध कार्य धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, जो अच्छा संकेत नहीं है।

वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र मखैक ने अपने संबोधन में कहा कि सोशल मीडिया ने प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। सोशल मीडिया विश्व भर में अपनी सूचनाएं पलों में पहुंचा रहा है, जिससे खासकर प्रिंट मीडिया पर दबाव बढ़ गया है। यही कारण है जो 'वीक' जैसी पत्रिका को भी ऑनलाइन होना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने आम आदमी को ताकतवर बना दिया है और देशों की सीमाओं के बंधन को तोड़ दिए हैं। आज राजनेता से लेकर सेलिब्रीटी तक सब सोशल मीडिया के प्रभाव में हैं। श्री मखैक ने इस सोशल मीडिया के खतरों से भी आगाह किया और कहा कि यह पूरी तरह से अनियंत्रित है और कई बार बुरी स्थिति पैदा कर सकता है।

द ट्रिब्यून के एसोसिएट एडिटर दिनेश कुमार ने कहा कि प्रिंट मीडिया के सामने हर शाम को ये चुनौती होती है कि वो रीडर को सुबह के लिए क्या नया दे। सब कुछ ट्वीटर, फेसबुक और वैबसाइटों पर पहले ही आ चुका होता है। सूचनाओं का एक तरह से विस्फोट हो रहा है और इसके क्रांतिकारी प्रभाव सामने आ रहे हैं। मिस्र समेत कई देशों में सोशल मीडिया ने क्रांति ला दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में परंपरागत मीडिया के लिए इन्वेस्टिगेटिव जर्नालिज्म करना जरूरी हो गया है।

पीआरएसआई के शिमला चैप्टर के अध्यक्ष बीडी शर्मा का कहना था कि देश में सोशल मीडिया तेजी से उभर रहा है, जिससे जन सम्पर्क व्यवसायियों के सम्मुख चुनौतियों के साथ-साथ अपेक्षाओं के अनुरूप बेहतर सेवाएं प्रदान करने के अवसर भी मिले हैं। उन्होंने अधिक विशुद्ध और तेज गति के साथ सूचनाओं के सम्प्रेषण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि पीआरएसआई के साथ जन सम्पर्क और कारपोरेट जगत के व्यवसायी जुड़े हैं। यह सोसायटी जन संपर्क में व्यावसायिक दक्षता लाने के साथ-साथ राष्ट्रीय, सामाजिक और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों को जागरुक बनाने कार्य कर रही है।

शिमला से एच आनंद शर्मा की रिपोर्ट.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *