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परचून की दूकान पर बैठे चंदन मित्रा!

Shambhunath Shukla : भाजपा ने क्या सोच कर कथित पत्रकार चंदन मित्रा को राज्यसभा में भेजा है। वे पत्रकारों के बीच राजनीतिक हो जाते हैं और राजनीतिकों के बीच पत्रकार जैसा रुआब दिखाने लगते हैं। हकीकत में उन्हें न तो राजनीति की समझ है न ही वे लोकतंत्र की भावना को समझते हैं। ऐसे लेाग तो इस पार्टी की लुटिया ही डुबो देंगे।

Shambhunath Shukla : भाजपा ने क्या सोच कर कथित पत्रकार चंदन मित्रा को राज्यसभा में भेजा है। वे पत्रकारों के बीच राजनीतिक हो जाते हैं और राजनीतिकों के बीच पत्रकार जैसा रुआब दिखाने लगते हैं। हकीकत में उन्हें न तो राजनीति की समझ है न ही वे लोकतंत्र की भावना को समझते हैं। ऐसे लेाग तो इस पार्टी की लुटिया ही डुबो देंगे।

आज एनडीटीवी पर रवीश कुमार के प्राइम टाइम में यह महोदय जिस तरह उत्तेजित होकर राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने को लेकर उबल रहे थे उससे तो लगा कि भाजपा के बड़बोलेपन की जैसी हवा कर्नाटक में निकली है वैसा ही गुब्बारा लोकसभा चुनाव में फूटेगा। इस मामले में शरद यादव ने सार्वजनिक बयान दिया है कि राजनीतिक दल कोई परचून की दूकान नहीं हैं। पर जिस एनडीए के वे अध्यक्ष हैं उसी का नेता एक परचूनिए की तरह बयानबाजी करता है।

चंदन मित्रा की तुलना में अन्य राजनीतिक दलों के नेता तार्किक बात कर रहे थे। चाहे वो सपा के कमाल फारूखी हों या एनसीपी के गुलाम मलिक अथवा शांताराव नाइक। वैसे रवीश के इस शो में कांग्रेस का कोई आदमी नहीं रखा गया था। पर एक सवाल का जवाब तो कांग्रेस को भी देना पड़ेगा। भारत निर्माण का जो विज्ञापन आजकल सरकार खूब चलवा रही है वह अगर वाकई सिर्फ सरकार का ही विज्ञापन है तो फिर इसमें सोनिया की फोटो क्यों लोड की जाती है?

वरिष्‍ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्‍ला के एफबी वॉल से साभार.

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