परीक्षा में अखिलेश को सौ नंबर यानी माई-बिटिया गौनहर, बाप-पूत बजनिया

वो किसी को भी हतप्रभ कर देने वाला वाकया था। यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान प्रतापगढ़ के एक परीक्षाकेंद्र में उड़नदस्ते की टीम ने छापा मारा तो वहां का नजारा देख दंग रह गए। ब्लैक बोर्ड पर लिखे परीक्षा के सवालों के जवाब परीक्षार्थी उत्तर पुस्तिका में हूबहू उतार रहे थे। टीम के मुखिया का चेहरा गुस्से से लाल। ब्लैक बोर्ड की तरफ तेज आवाज में केंद्र प्रभारी को डपटा-ये…आखिर हो क्या रहा है? उससे से भी कड़कती आवाज में केंद्र प्रभारी ने कहा- देख नहीं रहे हैं, बोर्ड की परीक्षा बोर्ड पर हो रही है (यूपी बोर्ड की परीक्षा ब्लैक बोर्ड पर)।

केंद्र प्रभारी के तेवर देख उड़नदस्ता टीम के मुखिया बैकफुट पर आए। आवाज थोड़ा नरम किया। बोले- ’बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।’ परीक्षा केंद्र प्रभारी भी थोड़ा नरम पड़े। टीम को आदर से कुर्सी पर बैठने का इशारा कर बगल खड़े सहकर्मी को जलपान लाने का आर्डर दिया। बोले- साहब, इत्मीनान से बैठिए। गर्मी तेज है, पहले रिलेक्स होइए। आपकी एक-एक बात का जवाब दूंगा। तब तक टीम के दूसरे सदस्य बुदबुदाए- ऐसी परीक्षा? क्या होगा इन बच्चों का? परीक्षा प्रभारी ने जवाब दिया-साहब यह बच्चों की नहीं, टीचर की परीक्षा है। ज्यादातर टीचर ही सवाल नहीं हल कर पा रहे। नकल की ऐसी ही दशा रही तो आने वाले समय में साल्वर खोजे नहीं मिलेंगे। काहे कि ज्यादातर ऐसे लोग परीक्षा पास करेंगे जो किताब का नाम और पाठ्यक्रम तक नहीं जानते होंगे।

तल्ख आवाज में परीक्षा प्रभारी ने कहा- परीक्षा की दुर्दशा की वजह उन नीति-नियंताओं से पूछिए जिन्होंने बोर्ड परीक्षा को तमाशा बनाकर रख दिया है। बहरहाल, रिजल्ट निकला। चारों तरफ धूम मच गई। नकल और परीक्षकों की महती कृपा कि कोई लड़का फेल ही नहीं, सब के सब पास। पहले जितने कुल परीक्षार्थी पास हुआ करते थे इस बार उतने परीक्षार्थी केवल फर्स्ट डिवीजन आए। साहब, नंबरों की झमाझम बरसात हो गई। कोई भी सेकंड-थर्ड नहीं। सो, ऐसे माहौल में सीएम अखिलेश यादव भी बंपर तरीके से पास हो गए। तीन महीने के कार्यकाल में उनके पिताश्री मुलायम सिंह यादव ने कॉपी जांची तो नंबर देने में ‘महती-कृपा’ कर दी। सौ में पूरे सौ नंबर दे डाले। वही हाल है ‘माई-बिटिया गौनहर, बाप-पूत बजनिया।’   

राजनीति वोट का विषय है। इसमें बॉयलोजी, मैथ्स के बजाए भूगोल, इतिहास, हिंदी की तरह कम नंबर मिलते हैं। सवाल है कि परीक्षार्थी से कमजोर को कॉपी जांचने और नंबर देने का अधिकार कितना उचित है? मत भूलिए, मुलायम सिंह को सूबे की जनता पिछले चुनाव में पूरी तरह से नकार चुकी है। इस बार सपा की जीत अखिलेश यादव को आगे कर चुनाव लड़ने, लैपटॉप-टेबलेट, बेरोजगारी भत्ता, जनता की गाढ़ी कमाई को मूर्तियों में लगाने, लुटेरे विधायक-मंत्रियों को जेल भेजवाने की लगातार घोषणाओं का परिणाम था। अहंकार ग्रस्त मायावती को सबक सिखाने के लिए जनता एकजुट हुई। भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रही भाजपा का भ्रष्टाचार के ‘हीरो’ को गले लगाने और कांग्रेस के युवराज राहुल का जनसभाओं में बांह मरोड़कर सबक सिखाने की शैली, इन सब दोहरी भूमिकाओं वाले नाटकों ने जनता को रिएक्ट किया।

चुनावी वादों का हाल किसी से भी छिपा नहीं है। ज्यादातर वादे हवा-हवाई। प्रतापगढ़ में समूची बस्ती फूंकी गई। छब्बीस मकान जले, दर्जनों लोग लहूलुहान। कई महिला-पुरूष अभी तक लापता हैं। सपा कार्यकर्ताओं द्वारा अफसरों की पिटाई। इलाहाबाद में फाफामऊ के विधायक के भाई का फाफामऊ बाजार में हंगामा। लालगोपालगंज टाउन एरिया में मूक बधिर ग्यारह साल की दलित बालिका से गैंगरेप, तीसरे दिन हुई पंचायत में आरोपी युवकों पर केस न करने के एवज में इक्कीस हजार रुपए का ‘जुर्माना’, इलाहाबाद के हंडिया इलाके के विधायक का दारोगा को चौकी में आकर जूते से पीटने की सरेआम धमकी। मुलायम यादवजी आखिर इन सबका माइनस नंबर कुछ होता है कि नहीं? हे नेताजी, जनता इन सबका जवाब चाहती है।

मामले का समापन एक और उदाहरण से। सन् 2001 में हमारा बेटा इंटर बोर्ड की परीक्षा में बैठा। रिजल्ट आया तो बेटे समेत उस कॉलेज के 54 बच्चे फर्स्ट डिवीजन आए। कॉलेज के प्रधानाचार्य, प्रबंधक से लेकर अभिभावक तक इतराने लगे, पर उन सबकी इतराहट थोड़े ही दिन रह सकी। दो महीने बाद हुई इलाहाबाद विश्वविद्यालय की बीए प्रवेश परीक्षा में उन 54 ‘मेधावी बच्चों’ में एक भी पास नहीं हो सका। मेरे जैसे तमाम पिताओं को तगड़ा झटका लगा। मुलायम सिंहजी आप भी अखिलेश के पिता हैं। इन घटनाओं से सबक लीजिए। 

लेखक शिवाशंकर पांडेय वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. दैनिक जागरण, हिंदुस्‍तान, अमर उजाला जैसे अखबारों में काम करने के बाद सक्रिय रूप से स्‍वतंत्र पत्रकारिता में जमे हुए हैं. इनसे संपर्क 09565694757 के जरिए किया जा सकता है.

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