पाकिस्तान में पत्रकारिता के क्षेत्र में हिंदू बहुत कम हैं (इंटरव्यू : महेश कुमार)

: भारत दौरे पर आए पाकिस्तानी पत्रकार महेश कुमार से बातचीत : पाक में हिंदुओं को नहीं मिल सकता सर्वोच्च पद : टार्गेट किलिंग का हो रहे शिकार : एक दूसरे को लेकर गलतफहमी ज्यादा : मुंबई : हिंदुस्तान में यह अच्छी बात है कि यहां का अल्पसंख्‍यक मुस्लिम समुदाय के लोग भी देश का राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री बन सकते हैं पर, पाकिस्तान के संविधान की वजह से हिंदू इस सर्वोच्च पद तक कभी नहीं पहुंच सकते. सांप्रदायिक लोग यहां भी हैं और वहां (पाकिस्तान) भी, जिसकी वजह से पाक में कभी-कभी हिंदुओं को परेशानी उठानी पड़ती है. यह कहना है मुंबई दौरे पर आए पाकिस्तानी पत्रकारों के दल में शामिल एकमात्र हिंदू पत्रकार महेश कुमार का.

पहले भी भारत आ चुके महेश कुमार हैदराबाद प्रेस क्लब के अध्यक्ष रह चुके हैं और हैदराबाद से प्रकाशित एक सिंधी अखबार के चीफ एडिटर हैं. पाकिस्तान में धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं के सवाल पर महेश कुमार ज्यादा कुछ नहीं बोलना चाहते. इतना जरूर कहते हैं कि इधर टार्गेट किलिंग की घटनाएं बढ़ी हैं और कानून व्यवस्था की खराब हालत के चलते धर्मांतरण की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है. उन्होंने बताया कि जियाउल हक के समय में तो वहां हिंदुओं को मतदान का भी अधिकार नहीं था. पर, बाद में यह

महेश कुमार
काला कानून समाप्त कर दिया गया. अभी भी पाकिस्तान में हिंदू 'वोट बैंक' नहीं है और जातियों में बंटा हुआ है.

एक सवाल के जवाब में महेश कुमार ने कहा कि वाकई भारत में मुस्लिमों की स्थिति बहुत अच्छी है. उन्हें हर जगह प्रतिनिधित्व मिलता है, लेकिन पाकिस्तान में आम लोगों का यही मानना है कि हिंदुस्तान में मुसलमानों पर जुल्म होता है. एक दूसरे को लेकर काफी गलतफहमियां हैं. जिसे दूर करने की आवश्यकता है. महेश कुमार 20 साल से पत्रकारिता में हैं. वे बताते हैं, पाकिस्तान में पत्रकारिता के क्षेत्र में हिंदू बहुत कम हैं. इसके बावजूद मुझे कभी इस फील्ड में उपेक्षा नहीं सहनी पड़ी. हमारे साथियों ने मुझे हैदराबाद प्रेस क्लब का अध्यक्ष भी चुना. महेश कुमार ने बताया कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में तो हर गांव में आपको एक से अधिक मंदिर मिल जाएंगे, पर हो सकता है कि पाकिस्तान के और हिस्सों में ऐसी स्थिति न हो. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच दुश्मनी बढ़ाने में मीडिया ने भी भूमिका निभाई है. हमारी आपसी लड़ाई में हमारा बहुत नुकसान हो चुका है. समय के साथ पाकिस्तान में भी अल्पसंख्‍यकों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है.

महेश कुमार ने कहा कि मुझे यह मानने में कोई गुरेज नहीं होगा कि पाकिस्तान की अपेक्षा हिंदुस्तान ने हर क्षेत्र में बहुत प्रगति की है. इसके बावजूद भारत में पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा गरीबी दिखाई देती है. इसका कारण भारत की विशाल जनसंख्‍या भी हो सकती है. पाकिस्तान में हिंदी की हालत की बावत उन्होंने कहा कि उर्दू पाकिस्तान की आधिकारिक भाषा है, जिसकी वजह से पाकिस्तान का हर आदमी हिंदी समझता है लेकिन वहां हिंदी देवनागरी लिपि का अस्तित्व नहीं है. पहले मंदिरों में हिंदी पढ़ाई जाती थी. मैंने भी मंदिर में थोड़ी हिंदी पढ़ी थी. अब वह भी बंद हो चुकी है. कुमार ने बताया कि पाकिस्तान में हिंदी फिल्मों व इसके कलाकारों को लेकर जबरदस्त आकर्षण है. मैं यहां आ रहा था तो मेरे बच्चों ने कहा कि मुंबई से हमारे लिए केवल आमिर खान व अमिताभ बच्चन के ऑटोग्राफ वाले फोटो लाना. 

महेश कुमार का इंटरव्‍यू करने वाले विजय सिंह 'कौशिक' मुंबई में पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *