पाठकों की नजर में ‘जानेमन जेल’ : चंदन श्रीवास्तव की टिप्पणी

Chandan Srivastava : मैंने जितनी किताबें (संस्मरण या उपन्यास) पढी हैं उसमें चेतन भगत ही फेसबुक के कम्युनिकेशन्स का यूज अपनी किताबों मे करते मुझे मिले. "REVOLUTION 2020"!!! आज भी गोपाल याद आता है तो उसके लिए रोने का मन करता है. उसका आरती से वो फेसबुकिया कम्युनिकेशन. "GopalKotaFactory: hi FlyingAarti:Hey! Guess what! ….." या आरती का अपनी शादी पर गोपाल को भेजा गया वो आखिरी मैसेज "Come. but only if u want to"

खैर फेसबुकिया कम्युनिकेशन आज "जानेमन जेल" मे भी पढने को मिला. जी वही Yashwant भाई वाली "जानेमन जेल". कुछेक पैराग्राफ मे कई पुस्तकों की समीक्षा भी निपटा डाली है भईया आपने. जेल का ऐसा पॉजिटिव और खूबसूरत चित्रण तो शायद ही किसी ने किया हो. जेल के बन्दियों से तमाम चर्चाओं से कई बातें निकलती है जैसे डावरी एक्ट का बेजा इस्तमाल या सभी इंसानों के भीतर एक अच्छा इंसान भी होता है, का सेंट्रल आईडिआ या आपका वो अनुभव "सभी का एक इगो होता है, अगर उसे समझ लिया जाय और उसके मुताबिक खुद को थोड़ा मोडिफाई कर लिया जाय तो अगला आपके साथ नॉर्मल या अच्छा व्यवहार करने लगेगा." Yashwant bhai u r superb as always…

पत्रकार चंदन श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.


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