पीछा छुड़ाने के लिए नेशनल दुनिया के एडिटोरियल डाइरेक्‍टर बनाए गए आलोक मेहता

नेशनल दुनिया प्रबंधन ने इस समूह के एकलौते एडिशन के समूह संपादक आलोक मेहता को एडिटोरियल डाइरेक्‍टर बना दिया है. हालांकि उपरी तौर पर इसे आलोक मेहता का प्रमोशन के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है, जबकि अंदरखाने की बात यह है उनके तरीके से किनारे कर दिया गया है. इस पद पर करने के लिए कुछ खास बचा भी नहीं है. वैसे भी तमाम मीडिया समूहों में इस तरह की नीतियां पहले भी अपनाई जाती रही हैं. जब वरिष्‍ठों को प्रमोट करके किनारे किया जाता है.

इंडिया टुडे समूह ने इसी तरह से प्रभु चावला को प्रमोट कर दिया था तथा उनकी जगह एमजे अकबर को संपादक बना दिया था. प्रबंधन का इशारा समझते हुए प्रभु चावला ने इस्‍तीफा दे दिया और न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस से जुड़ गए. इसी तरह के तमाम प्रमोशन कई वरिष्‍ठ पत्रकारों ने झेले हैं. माना जा रहा है कि प्रबंधन ने आलोक मेहता को इशारा कर दिया है. अब यह देखना बाकी है कि आलोक मेहता खुद नेशनल दुनिया से चले जाते हैं या फिर एडिटोरियल डाइरेक्‍टर बनकर नेशनल दुनिया को अपनी सेवाएं देते हैं.

वैसे भी उनके नजदीकी लोग अब नेशनल दुनिया से अपना बोरिया बिस्‍तर समेटने लगे हैं. कुछ लोग अभी भी उम्‍मीद में हैं कि शायद उनकी पारी लंबी खिंच सकती है. वैसे भी प्रबंधन ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि वे अपने समूह का विस्‍तार करने जा रहे हैं. इसके लिए वे अलग-अलग संपादक भी नियुक्‍त करेंगे. यानी आलोक मेहता को अब यहां करने के लिए कुछ नहीं बचा है, सिवाय एडिटोरियल डाइरेक्‍टर के पद के. आलोक मेहता के कद और शख्सियत को देखते हुए माना जा रहा है कि जल्‍द ही वे नेशनल दुनिया से अलग अपनी नई दुनिया बसाएंगे.

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