पीसीआई ने पेड न्‍यूज मामले में हिंदुस्‍तान को क्‍लीन चिट दी

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने ‘हिन्दुस्तान’, पटना को पेड न्यूज के मामले में सम्मान के साथ क्लीन चिट देते हुए अपना वह आदेश वापस लेकर रद्द कर दिया है, जिसमें अखबार की निंदा की गई थी। काउंसिल ने सोमवार को जारी अपने आदेश में कहा कि ‘हिन्दुस्तान’ की समीक्षा अर्जी पर विचार करने पर पाया गया कि उसके खिलाफ लगे पेड न्यूज के आरोप सही नहीं हैं। हिन्दुस्तान ने बिहार में 2010 के विधानसभा चुनावों के दौरान ‘विशेष संस्करण’ और ‘प्रायोजित संस्करण’ छापे थे। इनमें कोने में बाकायदा ‘प्रायोजित’ शब्द लिखा रहता था। समीक्षा अर्जी में हिन्दुस्तान ने काउंसिल को ये सभी साक्ष्य दिखाए।

काउंसिल के अध्यक्ष जस्टिस मार्केंडय काटजू व सदस्यों ने 18 फरवरी को दिल्ली में बैठक कर इन साक्ष्यों पर विस्तृत विचार किया। इस दौरान पाया गया कि जो सामग्री छापी गई है, उसे पेड न्यूज नहीं कहा जा सकता, बल्कि ये विज्ञापन थे। ‘हिन्दुस्तान’ की ओर से बताया गया कि जो विशेष परिशिष्ट या प्रायोजित सामग्री छापी गई थी, उनके लिए बाकायदा तय दरों पर प्रायोजकों से पैसा लिया गया। अखबार ने इस भुगतान की रसीदें भी काउंसिल में पेश कीं। काउंसिल ने इन साक्ष्यों को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया और हिन्दुस्तान को कलीन चिट देने का फैसला किया।

इसके बाद काउंसिल की उप सचिव पूनम सिब्बल ने पेड न्यूज के आरोपों से क्लीन चिट देने वाला आदेश सोमवार को जारी कर दिया। इस आदेश की कॉपी भारतीय निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली और मुजफ्फरपुर के जिला चुनाव अधिकारी व डीएम को भी प्रेषित कर दी गई है।

गौरतलब है कि प्रेस काउंसिल ने स्वत: संज्ञान के आधार पर इस मामले का संज्ञान लिया था। लेकिन काउंसिल से इस तथ्य की अनदेखी हो गई कि विवादित सामग्री के कोने पर ‘प्रायोजित’ और ‘एडीवीटी’ लिखा हुआ था। इसकी वजह काउंसिल को दी गई फोटो कॉपी थीं, जिनमें ‘प्रायोजित’ और ‘एडीवीटी’ शब्द स्पष्ट रूप से नहीं दिखाई दे रहे थे।

इस कारण काउंसिल ने इन सामग्री को पेड न्यूज मान लिया और हिन्दुस्तान, पटना के खिलाफ 21 दिसंबर 2012 को निंदा का आदेश पारित कर दिया। मगर, जब इस आदेश की कॉपी ‘हिन्दुस्तान’ को मिली तो तुरंत 4 फरवरी को काउंसिल के समक्ष समीक्षा याचिका दायर कर वस्तुस्थिति बताई गई। (हिंदुस्‍तान)

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