पुलिसवालों, जासूसों, बाउंसरों की घेरेबंदी तोड़ पत्रकारों का पूरे फिल्म सिटी में ‘अंबानी के दलालों’ के खिलाफ नारेबाजी : प्रदर्शन की तस्वीरें (2)

: पुलिस के पहरा के बीच सीएनएन-आईबीएन और आईबीएन7 के दफ्तरों को पत्रकारों ने घेरा : सीएनएन आईबीन और आईबीए7 के दफ्तर में करीब 100 से ज्यादा पत्रकारों के जत्थे ने प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन 325 मीडियाकर्मियों को नौकरी से निकालने के खिलाफ था. जर्नलिस्ट सोलिडरिटी फोरम के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान आईबीएन प्रबंधन ने भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात करवा दिया था. सबसे पहले यूपी पुलिस की टीम वहां पहुंची उसके बाद दिल्ली पुलिस को भी बुलवा लिया गया.

फोरम के पत्रकार विकास कुमार ने प्रदर्शन स्थल से बताया कि आईबीएन7 के नोएडा स्थित दफ्तर के सामने प्रदर्शन के बाद फिल्म सिटी में स्थित तमाम टीवी चैनलों के दफ्तरों के सामने से प्रदर्शनकारियों का काफिला गुजरा. इसका मतलब था कि प्रदर्शनकारी उन तमाम चैनलों को संकेत दना चाहते थे कि अगर वे पत्रककारों का शोषण करेंगे तो उनके खिलाफ भी आंदोलन चलेगा.

इस प्रदर्शन में टीवी चैनलों के प्रबंधकों ने अपने पत्रकारों को दफ्तरों से निकलने से रोका. लेकिन तमाम चैनलों के पत्रकारों ने अपने न्यूज रूम से एसएमएस करके इस विरोध प्रदर्शन को समर्थन दिया. इस प्रदर्शन के बाद मीडिया हाउसों के प्रबंधकों के कान खड़ हो गये हैं. लेकिन मीडिया घरानों की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ज्ञात हो कि टीवी18 ग्रुप से पत्रकारों के निकाले जाने के बाद दिल्ली से पटना तक विरोध के स्वर सामने आने लगे हैं. पटना में 26 अगस्त को विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गयी है.

दो समाचार चैनलों आईबीएन7 और सीएनएन-आईबीएन से सैकड़ों पत्रकारों को निकाले जाने के विरोध में जर्नलिस्ट सोलिडेरिटी फोरम (जेएसएफ) ने दोनों चैनलों के गेट के सामने प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में भारी संख्या में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार जेएसएफ के बैनर तले दोपहर दो बजे से विभिन्न संगठनों दिल्ली पत्रकार यूनियन, ,पीपुल्स यूनियन फोर ड्रेमोक्रेटिक राइट्स, जेएनयू छात्र संघ , आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन, ड्रेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन,आल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन, स्टूडेंट फोर रेजिस्टेंस और मारुति वर्कर्स यूनियन ने सीएनएन-आईबीएन और आईबीएन-7 के सामने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया.

गौरतलब है कि पिछले एक दशक में मीडिया में जारी कारगुजारियों को लेकर पत्रकारों द्वारा किया गया ये एक मात्र और अपने तरह का पहला विरोध प्रदर्शन है. जेएसएफ की मांग है कि IBN 7 और CNN-IBN से निकाले गए पत्रकारों को तत्काल वापस नौकरी पर रखा जाए और मीडिया संस्थानों के भीतर यूनियन बनाने के अधिकार की बहाली हो. इसके अलावा सभी मीडिया हाउसों में श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए तुरंत वर्किंग जर्नलिस्ट ऐक्ट लागू करें साथ ही मजीठिया आयोग की सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू किया जाए. आने वाले समय में जेएसएफ की देश भर के मीडिया संस्थानों से निकाले जा रहे पत्रकारों का डाटाबेस तैयार करने की योजना है. साथ ही जल्द से जल्द मीडिया में जारी छंटनी को लेकर एक पब्लिक मीटिंग बुलाने का भी फैसला लिया गया है.

प्रदर्शन के दौरान जेएसएफ ने विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों से भी मुहिम के समर्थन की अपेक्षा जताई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए कारपोरेट के पत्रकारिता पेशे पर बढ़ते हुए दबाव का जमकर विरोध किया. प्रदर्शन में प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश नौटियाल, सुरेन्द्र ग्रोवर, भूपेन सिंह, भड़ास फार मीडिया के संपादक यशवंत सिंह, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता पी के शाही, दिल्ली जर्नलिस्ट यूनियन से एस के पांडे,  वरिष्ठ पत्रकार राजेश वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र कुमार, वरिष्ठ पत्रकार हैदर रजा आदि लोग शामिल हुए।

सामाजिक कार्यकर्ता महताब आलम ने मीडिया में बढ़ते भ्रष्ट्राचार, कारपोरेटों का बढ़ता दखल और कांट्रैक्ट कर्मचारियों के शोषण पर अपने विचार रखे. भूपेन सिंह ने कहा कि कारपोरेट समाचार चैनलों के संपादकों को यह साफ करना होगा कि वे चैनल में हिस्सेदार है या एक पत्रकार की भूमिका में काम कर रहे है. वरिष्ठ पत्रकार सुरेश नौटियाल ने आब्जर्वर समाचार पत्र के साथ हुए संघर्ष और मीडिया संस्थानों में यूनियन की जरूरत को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा की.

जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने पूरे आयोजन के बारे में फेसबुक वॉल पर लिखा-

''दिल्ली के नज़दीक ही बसे नॉएडा फिल्म सिटी में भारत के लगभग सभी बड़े टीवी चैनलों और अखबारों के दफ्तर हैं. आज वहाँ पहली बार मीडिया कर्मियों ने अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई. पूरे माहौल में सनसनी फ़ैल गई. ऐसा इस इलाके में पहले कभी नहीं हुआ था. फटाफट दूसरे चैनलों के भीतर बैठे मीडिया कर्मियों के फोन आने लगे कि आप लोगों की आवाजों से पूरे इलाके में हड़बड़ी मच गई है. आप लोग सिर्फ आईबीएन ही नहीं पूरे फिल्म सिटी में एक बार घूम जाइए. हम घूमे, नारे लगाए. माहौल गरमा दिया गया. जो लोग हक के लिये लड़ना छोड़ देते हैं उनकी आजादी और लोकतन्त्र पर गुंडों का कब्ज़ा हो जाता है.''


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छंटनी के खिलाफ सीएनएन-आईबीएन और आईबीएन7 के दफ्तरों के सामने हुए प्रदर्शन की तस्वीरें (1)

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