”पूरे देश के सम्पादक उदय जी तक मेरी पहुंच है, कोई कुछ नहीं कर सकता”

सेवा में, श्रीमान यशवंत जी। सादर नमस्कार। महोदय, मेरा नाम मुश्ताक अहमद है। मैं अमर उजाला के बिल्हौर ब्यूरो कार्यालय में विज्ञापन प्रतिनिधि के रूप में पिछले दो सालों से काम कर रहा हूं। मैं ब्यूरो चीफ श्री सत्येंद्र मिश्रा के साथ मिलकर विज्ञापन और खबरों दोनों का काम करता हूं। पहले मेरे पास अमर उजाला अखबार की एजेंसी थी, जिसके कारण मिश्रा जी के सम्पर्क में आया। मिश्रा जी ने मुझको पत्रकार बनाने के लिए कहा तो मैं उनके साथ घूमने लगा।

साल भर बाद उन्होंने मेरी नियुक्ति विज्ञापन प्रतिनिधि के रूप में करवा दी। जिसमें विज्ञापन का लक्ष्य पूरा होने पर मुझको प्रति महीने तीन हजार रुपए मिलने थे। लेकिन दो साल में न तो कभी लक्ष्य पूरा हुआ और न ही मुझको तीन हजार रुपए मिले। ब्यूरो चीफ को मैं अपनी मोटर साइकिल में पेट्रोल डलवाकर घूमाता रहा। कभी उन्होंने पेट्रोल डलवाने की जरूरत नहीं समझी। शराब पीने के लिए भी हमसे पैसे लिए जाते रहे। बिल्हौर के हर ठीक-ठाक आदमी से सत्येन्द्र ने किसी न किसी बहाने से रुपए उधार ले रखे हैं, मांगने पर टका सा जवाब दिया जाता है। विज्ञापन में मिले कमीशन से भी बंटवारा किया गया। हमने विज्ञापन छापे तो उसके पैसे ब्यूरो चीफ या उनका चेला चपरासी केशव वसूल लाया। वह खुद को क्राइम रिपोर्टर भी बताता है।

विज्ञापन में निकले विज्ञापनदाताओं के फ्रिज, वाशिंग मशीन, कूलर आदि इनाम भी ब्यूरो चीफ हजम कर गया। इधर कई दिनों से ब्यूरो चीफ का आतंक बहुत बढ़ गया तो हमने कानपुर कार्यालय में दो बार शिकायत की। वहां से बराबर कहा जा रहा है कि जांच की जा रही है, तुम्हें न्याय मिलेगा। लेकिन जिस तरह से ब्यूरो चीफ सड़क पर शराब पीकर चिल्लाते घूम रहे हैं कि किसी की औकात नहीं है मुझे अमर उजाला से निकलवाने की। पांच साल से बिल्हौर में हूं सात साल तक और रहूंगा। दिनेश जुयाल दो बार औरैया भेज चुके हैं, औरैया में मेरा घर है, मैं नहीं गया अब किसी की हिम्मत भी नहीं है। पूरे देश के सम्पादक उदय जी तक मेरी पहुंच है, कोई कुछ नहीं कर सकता।

भाई मैं एचआर हेड श्री सतीश द्विवेदी और जीएम साहब श्री भूपेन्दर दुबे को अपना शिकायती पत्र दे चुका हूं। जिसको उन्होंने नोएडा भेजने की बात कही थी। इसके बाद क्या हुआ नहीं पता। इस बीच मैंने कार्यालय जाना बंद कर दिया है, कानपुर से कहा गया है कि तुम अपना काम करते रहो, तुम्हें न्याय मिलेगा। लेकिन जिस तरह जांच लंबी खिंच रही है उससे लग रहा है कि ब्यूरो चीफ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी और मेरा हजारों रुपया डूब जाएगा, नौकरी भी चली जाएगी। अपने एक दोस्त की सलाह पर आपको इस उम्मीद के साथ पत्र लिख रहा हूं कि शायद मेरी बात संस्थान के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों तक पहुंचे जिससे सच्चाई सामने आए और मुझे न्याय मिले।

जीएम साहब को दिए गए पत्र को भी साथ में भेज रहा हूं।

मुश्ताक अहमद

बिल्हौर- प्रतिनिधि

मोबाइल नं0- 8859108096, 9919812445 

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