पूर्वी दिल्‍ली में कुछ नेताओं का मुखपत्र बन गया है दैनिक जागरण

पूर्वी दिल्ली में इनदिनों दैनिक जागरण कुछ नेताओं का मुखपत्र बनकर रह गया है. नेताओं के दौरे से लेकर दूसरे प्रोग्राम प्रमुखता से छापे जा रहे हैं. इतना ही नहीं कुछ नेताओं की प्रेस विज्ञप्ति तक जागरण कार्यालय से बनकर जा रही है. इसके अलावा कुछ नेताओं के कार्यक्रम तक जागरण कार्यालयों से तय हो रहे हैं. बात में कितनी सच्चाई है इसकी प्रमाणिकता पिछले एक माह के पूर्वी दिल्ली संस्कार को देख कर साफ लगाई जा सकती है.

दरअसल, दैनिक जागरण पूर्वी दिल्ली कार्यालय के मुख्य संवाददाता राजीव अग्रवाल इन दिनों कुछ छुटभैये नेताओं के मार्फ़त वरिष्ट नेताओं की चापलूसी करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं. स्थिति यह है कि प्रतिदिन बीजेपी के एक नेता आनंद त्रिवेदी अपनी वैगनार कार लेकर या तो जागरण के दफ्तर आ जाते हैं या फिर राजीव उन्हें फ़ोन करके बुला लेते हैं. बुलावे पर आना उनकी मजबूरी भी है क्योंकि उनको भी अपनी प्रेस रिलीज़ जो लगवानी होती है. उसके बाद राजीव अग्रवाल उनकी गाड़ी में बैठ कर पूर्वी दिल्ली की मेयर अन्नपूर्णा मिश्रा के ऑफिस पहुंच जाते हैं. वहां पहुंच कर राजीव अग्रवाल मेयर की चापलूसी करने में कोई कोई कोर कसर नहीं छोड़ते. राजीव अग्रवाल उन्हें कहां कब दौरा करना है उसकी सलाह भी देते हैं. इतना ही नहीं एक दिन पहले लगी खबर की तब तक चर्चा करते हैं, जबतक उन्हें उसका पारिश्रमिक न मिल जाये. इसके आलावा राजीव अग्रवाल मेयर और उनके बेटे कपिल के मीडिया सलाहकार भी बने हुए हैं.

मेयर के पीए को भी शीशे में उतरने में लगे हुए हैं. मेयर का कार्यक्रम को राजीव अपने अख़बार में तो छपवाते  ही हैं दूसरे अख़बार में खबर छपवाने के लिए प्रेस विज्ञप्ति बनाकर मेयर के बेटे और पीए को मेल भी करते हैं. यहाँ बता दें कि पूर्वी दिल्ली में जागरण के पाठक दिन ब दिन कम होते जा रहे हैं. इतना ही नहीं ऑफिस में भी वो ही लोग प्रेस रिलीज़ लेकर आते हैं जो उसके बदले जेब ढीली करने की ताकत रखते हैं. आम लोग तो अब जागरण से काटने लगे हैं. इसके आलावा राजीव अग्रवाल का रिकॉर्ड रहा है कि वो कंपनी से पेट्रोल का भुगतान तो लेते हैं पर फिल्ड में घूमने के लिए आज तक स्कूटर में किक नहीं मारी. वो हमेशा किसी ना किसी छुटभैये नेता की गाड़ी मंगाकर उससे जाते हैं. जब तक आनंद त्रिवेदी नहीं थे तब तक मास्टर अलाउदीन की वरसा गाड़ी से जाया करते थे. अगर किसी ने एक बार मना कर दी तो फिर उसकी प्रेस विज्ञप्ति लगाना बंद.   

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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