पूर्व सांसद का वक्तव्य- ”फीस नहीं दे सकते तो बच्चे क्यों पैदा किए?” (सुनें टेप)

पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर शहर के न्यू कालोनी के रहने वाले जावेद अपने दोनो बच्चों नाजिया जावेद और यासिर को तालीम दिला रहे थे. स्कूल की एक महीने की फीस जमा करने में देर क्या हुई, स्कूल के प्रबंधक पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा ने उनके बच्चों का बैग छीन कर स्कूल से बाहर का रास्ता दिखा दिया। वाकये से घबराकर जावेद अपनी पत्नी को लेकर स्कूल पहुंचे और फीस न दे पाने में अपनी असमर्थता जताते हुए कुछ मोहलत मांगी तो पूर्व सांसद ने वक्तव्य दिया- ''अबे साले तुम फीस नहीं दे सकते तो बच्चे क्यों पैदा किए? किसी खैराती स्कूल या मदरसे में बच्चों को क्यों नहीं पढ़ाते? अबे क्या हमने गरीब बच्चों को पढ़ाने का ठेका ले रखा है।''

जावेद ने जब शिक्षा का अधिकार अधिनियम का ज्रिक किया तो पूर्व सांसद आपे से बाहर हो गए। बकौल जावेद उन्होंने कहा अबे तू मुझे कानून सिखाएगा। जलालत और अपमानित होने का एहसास लिए जावेद साल भर से अर्जिया लिख-लिखकर और फरियाद लगाकर बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिलाधिकारी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, केन्द्रीय माध्ययमिक शिक्षा बोर्ड के समक्ष उनके बच्चों के साथ हुए अन्याय और भेदभाव के बारे में जानकारी देते हुए इंसाफ की गुहार लगाते चले आ रहे हैं।

इंसाफ पाने की उम्मीद लिए जावेद लखनउ पहुंचकर मंत्रियों से भी अपनी आपबीती कह चुके हैं। पर कहीं कुछ नहीं हुआ। सरकारी अधिकारियों की ओर से तो जावेद को साफ कहा गया कि जिनके खिलाफ आप शिकायत लेकर आए हैं वो पूर्व सांसद और रसूख वाले हैं और उनके बेटे राजेश कुशवाहा वर्तमान में सपा के जिला महासचिव हैं। ऐसे में हम कुछ नहीं कर सकते। थक हारकर जावेद ने न्यायलय का सहारा लेकर पूर्व सांसद के खिलाफ 156 (3) के तहत मुकदमा चलाए जाने का वाद दाखिल किया। इस पर मजिस्ट्रेट ने विगत 25 फरवरी को पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश भी दे दिया। विवेचना की शुरुआत कुछ इस तरह से हुई की जावेद के घर पहुंचे कोतवाल ने जावेद को ही समझाना शुरू कर दिया कि वो पूर्व सांसद हैं, तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम खामोश रहो।

जावेद के मानसिक उत्पीड़न और उसके बच्चों के मूल अधिकारों के हनन की अर्जी को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग अब तक तीन बार पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश के प्रधान शिक्षा सचिव को इस मामले की जांच करने को कह चुकी है लेकिन आयोग के पत्र का जबाव अब तक नहीं दिया गया। जावेद आज भी मानसिक आघातों के साथ अपने बच्चों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। दोनों बच्चे स्कूल से निकाले जाने के बाद 6 महीने तक यूं ही घर पर बैठे रहे। बाद में राष्ट्रीय बालक संरक्षण आयोग के हस्तक्षेप पर बीते नम्बवर में गाजीपुर के जे.के.बी पब्लिक स्कूल में बच्चों का दाखिला हुआ। जावेद का फोन नंबर 07398602313 है।

जावेद की पीड़ा को इस आडियो टेप के जरिए भी सुन सकते हैं..

 

भास्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट. संपर्क- 09415354828

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