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सुख-दुख...

”पेड न्यूज का काम भी स्थानीय संपादक उन्हीं के जरिए करवाता है”

अखबारों की रीढ़ होते हैं रिमोट एरिया में काम करने वाले स्ट्रिंगर। यही वे खबरें लाते हैं जिनके बूते एक अखबार स्थापित होता है। यह आज से नहीं वरन् जब से हिंदी अखबारों ने सांस्थानिक रूप लिया तब से ही है। स्वर्गीय गणेश शंकर विद्यार्थी जी अपने प्रताप में सबसे अधिक ध्यान इन्हीं स्ट्रिंगर्स का ही रखते थे और प्रताप इन स्ट्रिंगर्स की खबरों के बूते ही धूम मचाए थे। खासकर तमाम रजवाड़ों में तो प्रताप पर प्रतिबंध था।

अखबारों की रीढ़ होते हैं रिमोट एरिया में काम करने वाले स्ट्रिंगर। यही वे खबरें लाते हैं जिनके बूते एक अखबार स्थापित होता है। यह आज से नहीं वरन् जब से हिंदी अखबारों ने सांस्थानिक रूप लिया तब से ही है। स्वर्गीय गणेश शंकर विद्यार्थी जी अपने प्रताप में सबसे अधिक ध्यान इन्हीं स्ट्रिंगर्स का ही रखते थे और प्रताप इन स्ट्रिंगर्स की खबरों के बूते ही धूम मचाए थे। खासकर तमाम रजवाड़ों में तो प्रताप पर प्रतिबंध था।

आज भी अखबार इन्हीं स्ट्रिंगर्स के दम पर ही फलते फूलते हैं। मैं जहां-जहां संपादक रहा मेरी वरीयता में स्ट्रिंगर्स का मानदेय बढ़ाना पहला काम रहा। दूसरे हर जाति के लोगों को अपनी सूची में रखा। मैंने दलित, मुसलमान और यादवों को खूब बढ़ावा दिया ताकि वे अपने समाज की ज्यादा से ज्यादा खबरें दे सकें और अखबार एलीट क्लास की पाकेट से निकल सकें। मैंने उनके मानदेय बढ़ाए ताकि वे अपने काम का एक सम्मानजनक पैसा पा सकें। पर मैंने पाया कि वे बेचारे पीडि़त ही रहे। वजह संपादक सब जगह तो ध्यान नहीं दे पाता। स्ट्रिंगर्स एक तरफ तो अपनी-अपनी डेस्क के प्रभारी से पीडि़त रहते हैं।

प्रभारी उन्हें हुक्म देता है कि जब भी अपने यहां से आओ वहां की कुछ मशहूर चीज लेकर आओ और कभी भी उन्हें इसके बदले में पैसा नहीं दिया जाता। और अगर मुख्यालय का स्ट्रिंगर हुआ तो उसे चीफ रिपोर्टर तंग करता रहता है। हर जोखिम के काम में स्ट्रिंगर को लगाएगा और जहां कुछ मिलने के आसार हुए खुद जाएगा। उसके बाद स्थानीय संपादक अपने काम करवाएगा, अपनी पत्नी की जरूरतों का सामान मंगवाएगा, पेड न्यूज का काम भी स्थानीय संपादक उन्हीं के जरिए करवाता है। और जरा भी हीला हवाली की तो सबसे पहले स्ट्रिंगर को हटाएगा। हिंदी पत्रकारिता की इस सड़ांध को दूर करने के लिए भी कोई एजेंसी होनी चाहिए।

वरिष्‍ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्‍ल के एफबी वॉल से साभार.

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