पेड न्यूज पर विशेष निगाह के लिए कानपुर में बनी मॉनिटरिंग कमेटी

कानपुर से खबर है कि लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चुनावी खर्च पर पैनी नजर रखने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है. इसी कड़ी में मीडिया कैम्पेनिंग को लेकर आयोग ने खास दिशा-निर्देश जारी किये हैं. चुनाव आयोग का मानना है कि खुद की मार्केटिंग-ब्रांडिंग के लिए पार्टी उम्मीदवार सबसे ज्यादा रकम खर्च करता है. इसके लिए प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया समेत रेडियो एफएम का जमकर इस्तेमाल होता है.

चुनावी मौसम में मीडिया के इन सभी प्लेटफॉ‌र्म्स पर विज्ञापनों की भरमार रहती है. इनके जरिए प्रत्याशी वोटर्स को लुभाने की भरपूर कोशिश करते हैं. इलेक्शन ऑफिसर्स के अनुसार अपने समर्थकों के जरिए विज्ञापन स्पॉन्सर करवाना भी इसी कड़ी का हिस्सा है. आयोग ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, एफएम चैनल्स के लिए बाकायदा विज्ञापन का रेट कार्ड भी जारी कर दिया है.

आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवारों को सोच-समझकर खर्चे करना पड़ेगा. क्योंकि अब पाई-पाई का हिसाब रखा जाएगा. संयुक्त मुख्य निर्वाचन आयुक्त रमाकांत पांडेय ने हर जिले में 'मीडिया सर्टीफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी' बनाने संबंधी गाइडलाइंस जारी की हैं. यह कमेटी जिलाधिकारी यानि डीएम के अधीन काम करेगी. किस पार्टी का उम्मीदवार मीडिया के किस प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन के लिए कितना खर्च कर रहा है.. ऐसी तमाम जानकारियों के बारे में कमेटी सूचनाएं जुटाकर उसकी रिपोर्ट तैयार करेंगी. इन सभी रिपो‌र्ट्स को चुनाव आयोग के पास भेजा जाएगा.

चुनाव के दौरान मीडिया में आने वाली पेड न्यूज पर कमेटी की विशेष रूप से निगाह होगी. एडीएम सिटी व इलेक्शन प्रभारी अविनाश सिंह ने बताया कि मीडिया में आने वाली पेड न्यूज को लेकर ज्यादा अलर्ट रहने को कहा गया है. अगर कोई मीडिया किसी प्रत्याशी के बारे में रोज-रोज पॉजिटिव आर्टिकल-रिपो‌र्ट्स पब्लिश करता है या चैनल्स पर दिखाता है, जिससे उसका प्रमोशन होता है. तो उसे पेड न्यूज की कैटेगरी में रखा जाएगा. हर हफ्ते के आखिरी दिन मॉनिटरिंग कमेटी पेड न्यूज की जानकारी आयोग को मुहैया कराएगी.

एडीएम सिटी अविनाश सिंह का कहना है कि मीडिया के डिफरेंट प्लेटफॉ‌र्म्स पर विज्ञापन के जरिए उम्मीदवार अपनी मार्केटिंग-ब्रांडिंग में भी खर्चा करते हैं. इन्हीं खर्चो पर नजर रखने के लिए मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया जा रहा है. अगर कहीं पेड न्यूज पाई जाती है तो उसकी जानकारी चुनाव आयोग को मुहैया कराई जाएगी. (आई-नेक्स्ट)

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