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पैसा जिसके बाप मैनेज करते हैं, वो तमाम फ्लॉप के बाद भी चलते रहते हैं : नवाजुद्दीन सिद्दीकी

Avinash Das : गुरुवार को धग [DHAG] के प्रीमियर में नवाज [Nawazuddin Siddiqui] मिल गये थे। हमने साथ फिल्‍म देखी और तय हुआ कि एक दिन अच्‍छे से बैठते हैं। फिर आज हम मिले और आधे दिन के साथ में उन्‍होंने मुझे फिल्‍म इंडस्‍ट्री की पॉलिटिक्‍स के बारे में विस्‍तार से बताया। संघर्ष करके खुद को साबित करने वाले अभिनेताओं को यह इंडस्‍ट्री आज भी हाशिये पर ढकेलने के मूड में रहती है।

Avinash Das : गुरुवार को धग [DHAG] के प्रीमियर में नवाज [Nawazuddin Siddiqui] मिल गये थे। हमने साथ फिल्‍म देखी और तय हुआ कि एक दिन अच्‍छे से बैठते हैं। फिर आज हम मिले और आधे दिन के साथ में उन्‍होंने मुझे फिल्‍म इंडस्‍ट्री की पॉलिटिक्‍स के बारे में विस्‍तार से बताया। संघर्ष करके खुद को साबित करने वाले अभिनेताओं को यह इंडस्‍ट्री आज भी हाशिये पर ढकेलने के मूड में रहती है।

नवाज ने बताया कि फैन फॉलोइंग के हिसाब से अर्जुन कपूर, प्रतीक बब्बर जैसों के मुकाबले मनोज वाजपेयी या इरफान या हम जैसों को चौराहे पर खड़े कर दो – लोग हमें पूछते हैं। लेकिन हमें लेकर कोई कंपनी 25, 30, 40 करोड़ की फिल्‍म नहीं बनाती है। इसके पीछे की राजनीति समझो। पैसा जिसके बाप मैनेज करते हैं, वो तमाम फ्लॉप के बाद भी चलते रहते हैं। हमें साइड में रखते हैं कि तुम तो साइड मैटेरियल हो। नवाज ने और भी कई किस्‍से बताये।

शायद मुझे नहीं बताना चाहिए, लेकिन टार्गेटेड नाम-गाम छुपा कर इतना बता देता हूं कि एक शानदार निर्देशक के पिछले तीन दशकों के समृद्ध अतीत का जिक्र करते हुए नवाज ने बताया कि वे अपना नया प्रोजेक्‍ट कॉरपोरेट के दबाव में एक ऐसे अभिनेता के साथ कर रहे हैं, जिसको एक्टिंग नहीं आती। क्‍यों? क्‍योंकि कॉरपोरेट को ऐसा स्‍टार चाहिए, जो उनके इशारे पर काम करे। सलमान, आमिर और शाहरुख अब स्‍वतंत्र हो गये हैं। अपना स्‍टेक मांगते हैं।

आमतौर पर इंटरव्यू में अभिनेता इस तरह की बातचीत नहीं करते। नहीं बताते। या कोई उनसे उनके अभिनय से इतर बाकी अंतर्कथाओं में दिलचस्‍पी नहीं दिखाता। कोई दिखाता है, तो वे टाल जाते होंगे कि पता नहीं उनकी किसी बात का इस्‍तेमाल और असर कैसा हो जाए।

मनोज भाई [Manoj Bajpayee] का शुक्रिया कि उन्‍होंने फिल्‍म इंडस्‍ट्री के बारे में ज्ञानवर्द्धन के लिए अपने घर का अनौपचारिक माहौल दिया। खाना भी खिलाया, बेसन का लड्डू भी खिलाया और चाय भी पिलायी।

पत्रकार और फिल्म समीक्षक अविनाश दास के फेसबुक वॉल से.

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