पौने तीन हजार पाकिस्तानी नागरिक कहाँ हो गए गायब?

बाड़मेर के सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी नागरिकों के गायब हो जाने के मुद्दे पर चिंता बढ़ती जा रही हैं। जब से थार एक्सप्रेस के रूप में बाड़मेर से होकर पकिस्तान जाने वाली ट्रेन की शुरुआत हुई है तभी से पाकिस्तानी नागरिक यहाँ आते हैं और सीमावर्ती इलाको में आकर गायब हो जाते हैं। इन्हें जमीन निगल गई यह आसमान खा गया कोई भी नहीं जानता। ना तो गुप्तचर एजेंसियों को इसकी कोई पुख्ता जानकारी हैं और ना ही गुप्चार एजेंसियां इस गम्भीर मामले पर अच्छी तरह से नज़र रख रही हैं। बाड़मेर के सीमा मामलों के पत्रकार दुर्गसिंह राजपुरोहित ने इस थार एक्सप्रेस के जरिये भारत आने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के गायब हो जाने की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले पहलू सामने आये – एक ख़ास रिपोर्ट।

: थार एक्सप्रेस से भारत आने के बाद तय सीमा पूरी हो जाने पर भी पाकिस्तान नहीं लौटे, अब उन्हें तलाशना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बनी टेढ़ी खीर : बाड़मेर। थार एक्सप्रेस। भारत और पाकिस्तान के मध्य राजस्थान के बाड़मेर जिले से संचालित होने वाली अंतर्राष्ट्रीय रेल सेवा। करीब सात साल पहले 18 फरवरी 2006 को यह रेल सेवा शुरू हुई तो यह उम्मीद की जा रही थी कि भारत और पकिस्तान के लोगों के लिए यह रेल सेवा वरदान साबित होगी। लेकिन वरदान से ज्यादा यह रेल सेवा मुल्क की सुरक्षा के लिहाज से अभिशाप साबित हो रही है। नकली नोट, नकली पासपोर्ट और वीजा से यात्रा करने वाले पाकिस्तानी नागरिक और सबसे गम्भीर मुद्दा यहाँ आने के बाद वापस नहीं जाने वाले पाकिस्तानी।

दरअसल पाकिस्तान से भारत आने और यहां से वापस नहीं जाने की मंशा रखने वालों के लिए थार एक्सप्रेस वरदान बन गई है। पिछले वर्ष थार एक्सप्रेस से भारत आए 20 हजार 122 पाकिस्तानी नागरिकों में से 2828 जने वापस गए ही नहीं। ये कहाँ गये कोई जानता भी नहीं। ना तो सुरक्षा का दम भरने वाली गुप्तचर एजेंसिया और ना ही स्थानीय पुलिस। ये पाकिस्तानी नागरिक भारत में बसने की मंशा से यहीं सवा अरब की आबादी में खो गए हैं, जिन्हें ढूंढना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन-सा है। पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के चलते कई हिंदू परिवार पलायन कर थार एक्सप्रेस के जरिए पाकिस्तान से भारत आ रहे हैं। बीते वर्ष हिंदू परिवारों के आगमन में वृद्धि हुई है, लेकिन वापसी कम हुई है। जब तक थार एक्सप्रेस शुरू नहीं हुई थी, तब तक एक आम पाकिस्तानी परिवार के लिए पाक से भारत आकर बसना काफी चुनौतीपूर्ण हुआ करता था, लेकिन थार एक्सप्रेस ने राह आसान कर दी है। यही वजह है कि 2828 जने पाकिस्तान से यहां आकर जम गए हैं। इनमें से ज्यादा हिंदू ही हैं। भारत-पाक के बीच थार एक्सप्रेस शुरू होने के बाद दूरियां खत्म हो गई। अपनों से बिछोह का दर्द मिट गया तो आने जाने का सिलसिला शुरू हो गया। थार एक्सप्रेस दोनों मुल्कों के लिए वरदान साबित हो रही है। बीते एक साल के आंकड़ों पर गौर करें तो थार से 17924 यात्री पाक गए। जबकि 20122 यात्री भारत आए।

रिश्तों की खातिर छोड़ा पाक : पाक में रहने वाले हिंदू बढ़ते अत्याचारों से खुद को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं। साथ ही रिश्तेदार यहां होने की वजह से रिश्ते करने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते ये परिवार हिंदुस्तान में रहने के इच्छुक है। पाक से आए खेतसिंह (बदला हुआ नाम) बताते हैं हमारे रिश्तेदार हिंदुस्तान में रहते हैं। बेटों के रिश्ते तो पाक में हो जाते हैं, मगर बेटियों का रिश्ता करने के लिए हिंदुस्तान आना पड़ता है। बेटियों की शादियां करने के बाद कई सालों तक मिलन नहीं हो पाता है। इस स्थिति में यहां आकर बसना ही मुनासिब है।


 
गुप्तचर एजेंसियों का काम क्या हैं? : क्या सिर्फ धरने प्रदर्शन और ज्ञापन एकत्रित करना या विपक्षी पार्टियों की गतिविधयों की खबरें अपने उच्चाधिकारियों तक पहुंचाना ही बाड़मेर की विभिन्न गुप्तचर एजेंसियों का कर्तव्य हैं? ये बड़ा सवाल बाड़मेर में कार्यरत सीआईडी और पुलिस की गुप्तचर शाखा कही जाने वाली डीएसबी के लिए है। दरअसल यहाँ स्थित सीआईडी कार्यालय में काफी पद लम्बे समय से रिक्त हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समेत कई अन्य महत्वपूर्ण कार्मिकों का पद खाली हैं। सीमा चौकियां जिन पर मुल्क की सरहदों की सुरक्षा का जिम्मा था वो कम नफरी के चलते बंद कर दी गई, जबकि सीमावर्ती बाड़मेर में अब इस एजेंसी का काम बढ़ता ही जा रहा हैं। यहाँ सीआईडी कार्यालय के खाली पड़े पदों पर पिछले कई सालो से कोई भी अधिकारी नियुक्त नहीं हुआ हैं जो सरकार और राज्य के गृह मंत्रालय पर भी लापरवाही का ठप्पा लगाने को पर्याप्त हैं।
 
दूसरी ओर बाड़मेर में पुलिस की विशेष शाखा यानी डीएसबी की भी स्थिति इससे कम दुखद नहीं हैं। यहाँ नियुक्त पुलिस कर्मी सिर्फ धरने प्रदर्शन और ज्ञापन तक ही सीमित हैं। डीएसबी के कार्मिको को इस बात की कोई खबर नहीं हैं कि कितने पाकिस्तानी और विदेशी लोग सरहदी इलाको में छुपे हुए हैं। जबकि एक पाकिस्तानी नागरिक के शहर में स्थित निजी चिकित्सालय में नियुक्त होने की खबर पुलिस अधिकारीयों को पूर्व में दिए जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस पाकिस्तानी नागरिक के पास भारत की नागरिकता नहीं हैं और ना ही उसके पास बाड़मेर आने की अनुमति हैं। सवाल इतने गम्भीर हैं लेकिन जवाबदेही किसी के जेहन में नहीं हैं। देश की सुरक्षा का बंटाधार ऐसे हालतों से होना तय ही माना जाएगा वरना सरकार के साथ साथ बाड़मेर पुलिस को भी आमूलचूल परिवर्तन वर्तमान में चल रही व्यवस्थाओं में करने ही पड़ेंगे।

घिसे-पिटे जवाबों से कैसे चलेगा काम? : थार एक्सप्रेस से पाक से भारत आए यात्रियों के पुन: नहीं लौटने के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। रिकार्ड देखकर बता पाऊंगा। वीजा खत्म होने के बाद भी पाक नहीं जाने वाले यात्रियों की सूची तैयार की जा रही है। धीमाराम विश्नोई कार्यवाहक एएसपी सीआईडी (बीआई) बाड़मेर

फैक्ट फिगर्स

माह                                 पाक गए             भारत आए
जनवरी                             792                    979
फरवरी                              976                   1120
मार्च                                  1320                  1563
अप्रेल                                1373                  1542
मई                                   1876                  1916
जून                                  2603                  3604
जुलाई                               2067                 1969
अगस्त                             967                   1083
सितम्बर                          1328                  1884
अक्टूबर                           1032                  1185
नवंबर                             1205                   1625
दिसंबर                           1705                    1642
कुल                               17294                    20122

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