प्रकाश पोहरे कहिन- मैंने गोली नहीं मारी, दुर्घटना में मरा कर्मचारी

: ‘देशोन्नति’ को बदनाम करने की कोशिश है प्रकाश पोहरे पर आरोप : अग्रणी मराठी अखबार “देशोन्नति” के मुख्य संपादक प्रकाश पोहरे के बारे में गलत खबर छापकर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। देशोन्नति के एक पूर्व कर्मचारी की हादसे के दौरान मौत की खबर को जिस तरह से पेश किया है, वह बिल्कुल गलत और बेबुनियाद है। पिछले दिनों हुई घटना के बाद प्रकाश पोहरे के विरोधी अचानक एक साथ सक्रिय हो गए हैं और मामले को तूल देने में लगे हुए हैं। कई जगहों पर प्रकाशित खबरों में ‘देशोन्नति’ का पक्ष जानने की कोशिश किए बिना ही एकतरफा खबर छाप दी गई।

ऐसा कर विदर्भ के सबसे कद्दावर मीडिया समूह को साजिश के तहत बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। मैं इस पूरे घटनाक्रम में सबसे पहले यह साफ करना चाहता हूं कि प्रकाश पोहरे ने किसी पर भी गोली नहीं चलाई है, न ही वह किसी की हत्या में शामिल हैं। जो कुछ भी हुआ वह महज एक दुर्घटना थी, जो कर्मचारियों के बीच हुआ। इसका अफसोस देशोन्नति ग्रुप और इसके मुख्य संपादक प्रकाश पोहरे को भी है।

मामला यह है कि विदर्भ पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के तीनो अखबार ‘देशोन्नति (मराठी), राष्ट्रप्रकाश (हिन्दी) और कृषकोन्नति (साप्ताहिक)’ एनएससीएन प्रेस (निशांत सेटेलाइट कम्यूनिकेशन नेटवर्क लिमिटेड) में छपते थे। पिछले दिनों वहां तमाम गड़बड़ियों और कर्मचारियों की मनमानी के कारण देशोन्नति अखबार समूह ने यह तय किया कि अब एनएससीएन प्रेस में अखबार नहीं छापना है। इसके बाद कानूनी तौर पर नागपुर के जिलाधिकारी को घोषणापत्र देकर ‘देश पब्लिकेशन’, हनुमाननगर नागपुर और ‘वीआरजी इंफ्रास्ट्रक्चर’ ग्रेट नागरोड, नागपुर में विदर्भ पब्लिकेशन के तीनों अखबारों को छपवाया जा रहा था।

इधर, पिछले 7 सितंबर 2012 से ही एनएससीएन प्रेस में हड़ताल चल रही थी। काम नहीं होने के कारण कंपनी के प्रबंधकों ने नौ अक्तूबर को एनएससीएन प्रेस को बंद करने का निर्णय लिया। नियमानुसार सभी कर्मचारियों को दो महीने का अग्रिम वेतन दे दिया गया और श्रम आयुक्त को नियमानुसार इसकी सूचना भी दे दी गई। लेकिन इस निर्णय को मानने की बजाय कर्मचारी बौखला गए और प्रकाश पोहरे के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। यहां तक कि एनएससीएन प्रेस के सुरक्षा गार्ड भी कर्मचारियों से मिल गए।

वहां के श्रमिक संगठन, उसके नेताओं तथा कुछ बाहरी नेताओं और कुछ प्रतिस्पर्धियों ने प्रबंधन द्वारा रखी गई सिक्युरिटी को भी लालच देकर एवं बरगला कर अपने पक्ष में कर लिया था। इसके कारण प्रबंधन एवं उसके अधिकारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे थे। इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस थाने एवं पुलिस उच्चाधिकारियों को नियमति रूप से दी गई थी। बावजूद इसके वहां किसी भी प्रकार की पुलिस सुरक्षा मुहैया नहीं करायी गयी। इन सब बातों को देखते हुए और सुरक्षाकर्मियों की अनैतिक हरकतों के कारण नई सुरक्षा एजेंसी की नियुक्ति की गई।

बीते 13 अक्तूबर को घटना वाले दिन प्रकाश पोहरे, नवनियुक्त सुरक्षाकर्मियों को प्रेस स्थल दिखाने एवं ड्यूटी समझाने के लिए प्रेस स्थल गए थे। प्रकाश पोहरे के आने की खबर पाकर पहले ही कुछ पूर्व कर्मचारी और पूर्व सुरक्षाकर्मी अनैतिक रूप से प्रेस परिसर में घुस गए। पोहरे के प्रेस में आते ही पूर्वकर्मियों ने श्री पोहरे और नए सुरक्षाकर्मियों को घेर लिया और उनके साथ गाली-गलौच शुरू कर दिया। इस दौरान अचानक तकरीबन 20-25 पूर्व कर्मचारियों ने उन पर और नये सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया। उन्होंने पथराव भी किया। पूर्वकर्मियों ने बीच-बचाव कर रहे एक नये सुरक्षाकर्मी की बंदूक छीनने की कोशिश की। डराने के लिए सुरक्षाकर्मी ने हवाई फायर भी किया लेकिन पूर्वकर्मी नहीं माने।

इसी बीच छीना-झपटी में गोली चल गई और एक पूर्वकर्मी को लग गई। घटना के बाद नवनियुक्त रक्षकों ने अपनी जान बचाने के साथ-साथ श्री पोहरे को तुरंत वहां से सुरक्षित बाहर निकाल कर रवाना कर दिया। विदर्भ पब्लिकेश के हिन्दी दैनिक ‘राष्ट्रप्रकाश’ के कार्यकारी संपादक सुदर्शन चक्रधन ने इस बारे में कहा कि पिछले तीन सालों से हड़ताल औऱ आंदोलन की सुनियोजित साजिश चल रही थी। कई प्रतिस्पर्धी ‘देशोन्नति’ समूह को बदनाम करने की साजिश में लगे हुए थे। भाषायी समाचार पत्रों के समूह ‘इलना’ ने भी अपने वरिष्ठ साथी और इलना के महासचिव प्रकाशजी पोहरे के समर्थन में एक पत्र जारी किया है। मीडिया दिग्गज परेशनाथ इलना के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा है कि इलना प्रकाश पोहरे के साथ है।

लेखक अशोक दास ‘देशोन्नति’ के दिल्ली ब्यूरो के प्रभारी हैं.


मूल खबर- अखबार मालिक ने अपने कर्मचारी की गोली मारकर हत्या की

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