प्रभाष जी ने आम आदमी की भाषा को स्थापित किया : आरिफ मोहम्मद खान

: पत्रकार संजीव पांडेय की पुस्‍तक पेड न्‍यूज का विमोचन : नई दिल्ली। पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि प्रभाष जोशी को इस बात का श्रेय जाता है कि उन्होंने आम आदमी की भाषा को एक बड़े अखबार की भाषा बना दिया। वे यहां प्रभाष परंपरा न्यास और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किए गए ‘प्रभाष प्रसंग’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन प्रभाष जोशी के 76 वें जन्मदिन के मौके पर राजघाट स्थित गांधी दर्शन में किया गया था। इस मौके पर प्रभाष जोशी पर केन्द्रित डाक्‍युमेंट्री फिल्म दिखाई गई और संजीव पांडेय की पुस्तक 'पेड न्यूज', पाखी के प्रभाष जोशी पर केंद्रित अंक तथा जनसत्ता व राष्ट्रीय सहारा के प्रभाष जोशी पर केंद्रित परिशिष्टों का लोकार्पण भी किया गया।

आरिफ मोहम्मद खान ने ‘हमारा संविधान और व्यवस्था परिवर्तन’ विषय पर मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए कहा कि व्यवस्था और संविधान एक दूसरे से अलग नहीं हैं। वास्तव में संविधान का उद्देश्य था, एक ऐसी व्यवस्था बनाना जिससे देश की एकता और अखंडता मजबूत बने। हमारे संविधान निर्माताओं के सामने जो चुनौतियां थीं, उन्हें दूर करते हुए उन्होंने एक सुव्यवस्थित संविधान दिया। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान की महत् अकांक्षा एक मजबूत राष्ट्र बनाना था और इसी के मद्देनजर संविधान निर्माताओं ने संविधान के तौर पर पूरे देश का एक मेनिफेस्टो सामने रखा। दुर्भाग्य है कि आज हर पार्टी अपना अलग मेनिफेस्टो लेकर आती है, जिसे उसके अपने नेता तक याद नहीं रखते। वास्तव में पार्टियों पर पाबंदी होनी चाहिए कि संविधान जैसे सर्वसम्मत मेनिफेस्टो के बरक्स वे अपना अलग मेनिफेस्टो न ला सकें। आरिफ खान ने कहा कि समस्या व्यवस्था की नहीं है, इसलिए शिकायतें हमें सरकारी नीतियों और उन्हें लागू करने के प्रति करनी चाहिए। व्यवस्था बदलने की बात तो पहले भी बहुत की जाती रही है। व्यवस्था बदलने के नाम पर सरकारें बदली गईं, पर आखिरकार मायूसी हाथ लगी। समस्या दरहकीकत व्यवस्था की थी ही नहीं। उन्होंने आगे कहा कि आज हमें वर्तमान दौर की चुनौतियों को सामने से देखने की जरुरत है। हमें सोचना चाहिए कि हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान में धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान आदि के बारे में भेद-विभेद करने का निषेध किया था। लेकिन क्या व्यवहार में हम सचमुच ऐसा कर पाये। वास्तव में दोषी सिर्फ सरकारें नहीं, हम भी हैं। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि संविधान निर्माता देश को एकसूत्र में बांधना चाहते थे, पर आज का हमारा मीडिया तक पाखंड, अंधविश्वास जैसी चीजें फैलाकर समाज में दरार पैदा कर रहा है।

संजीव पांडेय की पुस्‍तक पेड न्‍यूज का विमोचन के मौके पर शीला दीक्षित व नामवर सिंह

इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए कहा कि प्रभाष जोशी बेहद संवेदनशील व्यक्ति थे। उनके मन में समाज की स्थिति और राजनीति को लेकर कुछ न कुछ उबाल की स्थिति बनी रहती थी। भारत को आगे बढ़ाने का विचार निरंतर उनके मन में बना रहता था। उन्होंने एक पत्रकार के तौर पर जो कुछ किया, उससे लाखों लोगों ने प्रेरणा ग्रहण की और आने वाली पीढ़ियां भी उनसे प्रेरणा लेती रहेंगी।

हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक डॉ. नामवर सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि प्रभाष जी ने जैसा गद्य लिखा वह दुर्लभ है। वास्तव में उनका हर वाक्य जैसे खादी का पवित्र धागा है। भाषा की शुद्धता उनकी खासियत थी, उससे हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। प्रभाष जी ने पत्रकारिता की जैसी नैतिक चुनौती हमारे सामने रखी है, वह हमारे लिए बड़ा सबक है। उनकी शानदार परंपरा को हम आगे बढ़ा सकें, तो बड़ी बात होगी।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर राम गोपाल यादव ने कहा कि प्रभाष जी का पूरा जीवन लोक संस्कृति, लोककला, लोकभाषा के लिए समर्पित रहा। उनके मिलने में भी एक मिठास थी। उनकी परंपरा को बनाए रखना हमारे लिए एक चुनौती है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने प्रभाष परंपरा न्यास द्वारा तीसरे प्रेस आयोग की मांग के बाबत चलाए जा रहे अभियान की जानकारी दी। इस अवसर पर पंडित कुमार गंधर्व के परिवार की मशहूर गायिका कलापिनी कोमकली ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में दिल्ली व दिल्ली के बाहर के पत्रकारों, बुद्धिजीवियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही।

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