प्रश्न ये है कि अब तक सेबी, कॉरपोरेट मंत्रालय, ईडी समेत अन्य जांच एजेंसियां, केंद्र सरकार और ममता दीदी की हुकूमत सोई क्यों रही?

Nadim S. Akhter : घोटाला कहीं भी हो, कांग्रेस का नाम आ ही जाता है…अब शारदा चिट फंड घोटाला कहने को तो वेस्ट बंगाल में हुआ लेकिन चिदंबरम साहब की बीवी और कांग्रेसी नेता चौधरी का नाम सामने आ गया…लेफ्ट पार्टीज की तो बल्ले-बल्ले….आम के आम और गुठली के भी दाम…टीएमसी और कांग्रेस, दोनों एक साथ लपेटे में और वो भी एक ऐसे मुद्दे पर, जिससे बंगाल की गरीब जनता का वास्ता है…अगर कभी बंगाल गए हों तो जानिएगा कि एक-एक पैसे की बंगाली भद्र समाज में कितनी कीमत है…चार आना क्या, एक पैसा भी नहीं छोड़ेगा कोई आपके पास…

तो बिल्ली के भाग्य से छीका फूट गया है और लेफ्ट पार्टीज के दोनों हाथ में लड्डू हैं….लगता है अगले लोकसभा चुनाव में बंगाल में लेफ्ट वालों की चांदी होने वाली है…ठीक भी है…जब सोने का भाव गिर रहा हो और पब्लिक का पैसा खुलेआम लूटा जा रहा हो, तो किसी न किसी पॉलिटिकल पार्टी को चांदी काटने का हक तो बनता ही है….सवाल ये नहीं है कि कितना पैसा किसने और क्यों खाया…प्रश्न ये है कि अब तक सेबी, कॉरपोरेट मंत्रालय, ईडी समेत अन्य जांच एजेंसियां, केंद्र सरकार और ममता दीदी की हुकूमत सोई क्यों रही….क्या ये इंतजार कर रहे थे कि पहले गरीब निवेशक लुट जाएं, फिर ये लोग सरकारी फीता निकाल कर नपाई करेंगे कि कितने इंच का चूना लगा है….वैसे रंगाई-पुताई होती रहनी चाहिए…घर में हो तो सफाई बनी रहती है और अर्थव्यवस्था में हो तो तरलता यानी liquidity बनी रहती है…तरलता नहीं समझे आप…अरे भई, कैश-कैश…शान से गिनिए और हर फिक्र को सिगरेट का कश मारकर धुएं में उड़ा दीजिए.

पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.

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