प्रापर्टी डीलर से बना मीडिया मुगल और हजारों पत्रकारों को बेरोजगार कर दिया

शारदा समूह के चेयरमैन सुदीप्त सेन ने एक रियल एस्टेट एजेंट से एक मीडिया मुगल बनने तक का सफर खासी तेजी से तय किया। संभवत: उन्होंने कारोबार के गुर रियल एस्टेट उपक्रमों के माध्यम से ही सीखे थे। चिट फंड कारोबार में उन्होंने वर्ष 2006 में कदम रखा। उसी दौर में से उन्होंने अपनी कई बड़ी कंपनियों में से एक शारदा टुअर्स ऐंड ट्रैवल्स को गैर बैंकिंग फाइनैंशियल कंपनी के रूप में पंजीकृत कराने की कोशिश की, लेकिन वह सभी शर्तों को पूरा नहीं कर सकी।

शारदा समूह की कई कंपनियां हैं, जिनमें से कुछ को कंपनी पंजीयक में पंजीकृत कराया गया था जो उसके लिए महज मुखौटा भर थीं। हालांकि शारदा रियल्टी, शारदा कन्स्ट्रक्शन, शारदा टुअर्स ऐंड ट्रैवल्स समूह की दिग्गज कंपनियों में आती थीं। लेकिन वर्ष 2010 में वह अचानक सुर्खियों में तब आए जब उन्होंने मीडिया कारोबार में कदम रखा। सेन ने काफी कम समय में ही इस क्षेत्र में काफी प्रसिद्घि पा ली। उन्होंने बंगाली समाचार चैनल 'चैनल 10' शुरू किया और इसके तुरंत बाद वर्ष 2010 में अंग्रेजी दैनिक बंगाल पोस्ट और बंगाली दैनिक सकालबेला की शुरुआत की गई। उन्होंने एक साथ कई अखबार शुरू करने के साथ ही तीन टीवी चैनलों का अधिग्रहण किया। यह सब कुछ काफी तेजी से हुआ और महज 2 साल की अवधि में कंपनी के अधिकार क्षेत्र में 10 मीडिया संस्थान आ गए।

हालांकि इनके मीडिया संस्थानों पर राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का साथ देने का भी आरोप लगता रहा। बहरहाल कंपनी में मीडिया प्रमुख की भूमिका निभाने वाले कुणाल घोष फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सांसद हैं। उन्होंने खुद को सुर्खियों से दूर रखा। उनका साफ निर्देश था कि मीडिया से जुड़ा कोई शख्स को उनका फोटा नहीं लेगा और उन्होंने अपनी रणनीतियों को सबकी नजरों से बचाकर रखा। अभी तक कुछ ही कर्मचारी ऐसे है जिन्हें उनसे मिलने का मौका मिला, कुछ ही उनको जानने का दावा कर सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कुणाल घोष शारदा ग्रुप मीडिया के मुख्य कार्याधिकारी थे, जो उनके मीडिया कारोबार का चेहरा भी थे।

माकपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सुदीप्त सेन संचयनी सेविंग्स ऐंड इन्वेस्टमेंट कंपनी के मालिक भूदेव सेन से संबंधित हैं, जो कंपनी खत्म हो गई थी। शारदा की निवेश जमा योजनाओं के एजेंटों का दावा है कि वह मृदुभाषी और खुशमिजाज व्यक्ति थे। वास्तव में उनमें से कुछ ही ने यह दावा किया कि उन्हें सालाना एजेंट मीट के दौरान उनसे मिलने का मौका मिला था। शारदा समूह की वेबसाइट पर सुदीप्त सेन की कोई फोटो नहीं है। मजे की बात है कि चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के पेज पर सिर्फ एक फोटो है, वह है खाली कुर्सी की।

इस साल बिगड़े हालात : कंपनी के लिए मुश्किल हालात इस साल फरवरी से ही शुरू हो गए थे और पत्रकारों के करीब 2 माह के वेतन का भुगतान नहीं किया गया था। शारदा समूह के अंग्रेजी दैनिक अखबार में काम करने वाले एक कर्मचारी ने कहा, 'जनवरी से ही हमें पैसे नहीं मिल रहे थे। यहां तक कि हमें भविष्य निधि के पैसे भी नहीं दिए गए।' उन्होंने कहा कि अखबार के संपादकीय विभाग को महज एक सप्ताह पहले ही बताया गया कि पहली अप्रैल से अखबार बंद हो जाएगा और 31 मार्च को अखबार का अंतिम प्रकाशन होगा। नोटिस के जरिये उन्हें कहीं और काम खोज लेने की सलाह दी गई।

इस बीच अपनी पूरी कमाई को शारदा की निवेश योजनाओं में लगाने वाली 50 साल की एक महिला ने कल खुद को आग के हवाले कर अपनी जान दे दी। पूरा पैसा डूब जाने के गम में उन्होंने आत्महत्या कर ली। इसके अलावा पिछले सप्ताह समूह के एजेंट और निवेशक पैसे वापस करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर के सामने धरना पर बैठे थे। (बीएस)

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