प्रेम की परिभाषा की तलाश है “मैं मुहब्बत” : डॉ. काशीनाथ सिंह

बनारस, 27 सितंबर। "मैं मुहब्बत" उपन्यास प्रेम की खोज का उपन्यास बल्कि कहिए की प्रेम की परिभाषा कि खोज का उपन्यास है। ये विचार प्रख्यात साहित्यकार और साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित डॉ. काशीनाथ सिंह ने बनारस के काशी विद्यापीठ में सैयद जैगम इमाम के उपन्यास के लोकार्पण के दौरान रखे।

उन्होंने कहा कि इसे पढ़ने के दौरान मैंने महसूस किया कि अगर कोई भी इस उपन्यास को उठाए और पढ़ना चाहे तो बीच में नहीं रूक सकता। पढ़ना शुरू किया तो पढ़ता चले जाए। आजकल जो लिखा जा रहा है अपाठ्य लिखा जा रहा है, पढ़ने का साहस जुटाना पड़ता है। मैं मुहब्बत अगर पढ़ना शुरू करें तो मैं दावा तो नहीं कर सकता लेकिन मजबूरी में ही अगर आप छोड़ेंगे तो छोड़ेंगे नहीं तो चाहेंगे कि बगैर छोड़े पढ़ते चले जाएंगे ये खासियत है इस उपन्यास में। डॉ. काशीनाथ सिंह ने जैगम को नई पीढ़ी और गंगा जमुनी तहजीब का विशिष्ट लेखक बताया।

सैयद जैगम इमाम बनारस के सीमावर्ती चंदौली के रहने वाले हैं और फिलहाल मुंबई में बीएजी फिल्म्स के साथ बतौर क्रिएटिव राइटर जुड़े हुए हैं इससे पहले वो अमर उजाला न्यूज 24 और आज तक को सेवाएं दे चुके हैं। इस मौके पर डॉ. काशीनाथ सिंह भावुक भी हो गए और कहा कि नामवर तो गए दिल्ली इमाम भी गए मुंबई मैं अकेला छूट रहा हूं अपने जनपद का लेकिन जब इन्होंने कहा कि इस किताब का लोकार्पण मैं बनारस में करना चाह रहा हूं तो मुझे लगा कि मेरा घर ये है। मुझे गर्व का एहसास हुआ।

ये उपन्यास मुस्लिम लेखकों की परंपरा से बिल्कुल हटकर है। ज्यादातर मुस्लिम लेखकों ने लिखा है, सांप्रदायिक समस्याओं के बारे में जो बहुत सहती रही हैं एक फार्मूले की तरह। ये उपन्यास कई अर्थों में अलग है। बनारस से शुरू होता है और एक त्रिकोण बनाता है। बनारस, नोएडा, दिल्ली। उपन्यास लोकार्पण के इस मौके पर कई प्रतिष्टित समाचार पत्रों के संपादक और बनारस के साहित्यकार और साहित्य प्रेमी मौजूद थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *