प्रेस काउंसिल ने मीडियाकर्मियों पर अत्याचार का मामला सही पाया, कार्रवाई व मुआवजे के निर्देश

हाथरस। विधान सभा चुनाव की पोलिंग पार्टियों की रवानगी की कवरेज करने गए मीडिया कर्मियों के साथ अभद्रता, कैमरे आदि तोड़ने तथा मारपीट कर घायल कर देने के मामले की कराई गई शिकायत को भारतीय प्रेस परिषद ने सही पाया है। इस मामले में परिषद ने दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने, नुकसान की भरपाई करने के आदेश शासन-प्रशासन को दिए हैं।

विधान सभा चुनाव के लिए पोलिंग पार्टियों की रवानगी से पूर्व गत 27 फरवरी 2012 को स्थानीय एमजी पॉलीटेक्निक में अराजकता का माहौल था। जिस पुलिस के पास नागरिकों की सुरक्षा का जिम्मा रहता है, वही पुलिस कर्मी अराजकता का नंगा नाच कर रहे थे। लाठी, डंडों व रायफल की वटों से सभी को पीटा जा रहा था।

वहां कवरेज करने गए पत्रकारों व छायाकारों के साथ जमकर तांडव का नंगा खेल खेला। जिससे वह घायल हो गए तथा उनके उपकरण टूटकर बिखर गए। इस मामले में पत्रकार अतुल कुलश्रेष्ठ व लालता प्रसाद जैन ने यह मामला भारतीय प्रेस परिषद में दर्ज कराया था। इस मामले में बनारस में प्रेस परिषद ने सुनवाई की। परिषद ने मुख्य सचिव सहित प्रशासन की ओर से डीएम व एसपी को तलब किया था। पूरा प्रकरण सुनने के बाद शिकायत को सही पाया और निर्णय सुनाते हुए कहा कि इस मामले में दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ एक्शन लिया जाए। पत्रकारों के हुए नुकसान की भरपाई सहित उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। इस सुनवाई में पत्रकारों के प्रतिनिधि के रूप में एडवोकेट गौरव अग्रवाल, सामाजिक कार्यकर्त्ता प्रवीण वार्ष्णेय तथा प्रशासनिक प्रतिनिधि के रूप में एसडीएम जेके जैन मौजूद थे। प्रेस काउंसिल का फैसला आने के बाद यहां पॉलिटैक्निक में पत्रकारों ने एक बैठक कर प्रेस काउंसिल के फैसले का स्वागत किया और इस मामले में अपनी जीत होने पर खुशियां मनाई।

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