फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी हथियाने की कोशिश का भांडा फूटा, एफआईआर

: बीटीसी चयन परीक्षा के दस प्रशिक्षु पकड़े गए, तीन महिलाएं भी शामिल : इलाहाबाद। बीटीसी 2012 के चयन में फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर दस अभ्यर्थियों ने नौकरी हासिल करने की कोशिश की पर पोल खुल जाने से सारा खेल बिगड़ गया। अब इनके जेल जाने की नौबत आ गई है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट दर्ज हो गई है। सभी आरोपी जल्द ही गिरफ्तार कर लिए जाएंगे।

दरअसल, इलाहाबाद डॉयट के प्राचार्य महेंद्र कुमार सिंह ने संदेह होने पर जनवरी 2013 में ओपेन स्कूल से सर्टिफिकेट के संदर्भ में आख्या मांगी थी। 30 जनवरी को स्कूल से जानकारी मिली कि यह सर्टिफिकेट फर्जी हैं। 27 फरवरी को डॉयट के प्राचार्य ने इन अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर बाकायदे स्थिति साफ करने को कहा पर कोई अभ्यर्थी सामने नहीं आया। बल्कि नोटिस मिलने के बाद ज्यादातर अभ्यर्थी फरार हो गए। जांच में पता चला कि इन अभ्यर्थियों ने हाईस्कूल, इंटरमीडिएट का सर्टिफिकेट फर्जी बनवा कर जमा किया था।

डॉयट प्राचार्य ने इन लोगों का सलेक्शन कैंसिल कर उनके खिलाफ शहर के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है। खास बात यह है कि फर्जीवाड़े में पकड़े गए सभी प्रशिक्षु मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं। ये अभ्यर्थी गलत तथ्यों का फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर बीटीसी में न सिर्फ चयनित हो गए बल्कि जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डॉयट) इलाहाबाद में ट्रेनिंग भी ले रहे थे। फर्जी तरीके से नौकरी हथिया लेने की कोशिश में लगे इन दस प्रशिक्षणार्थियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई है।

इलाहाबाद से शिवा शंकर पांडेय की रिपोर्ट. 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *