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फिर खड़ा होने की कोशिश में वीओएन, पर कर्मचारियों का टोटा

देहरादून के रायपुर इलाके के एक छोटे से घर से संचालित होने वाले वॉयस ऑफ नेशन चैनल को फिर से खड़ा करने की तैयारी ज़ोरों पर चल रही है। चैनल के मालिक मनीष वर्मा जेल से रिहा होते ही इस उधेड़ बुन में लग गए हैं। लेकिन इस चैनल का इस बार चल पाना बिल्कुल ही नामुमकिन सा लग रहा है। वजह है कि चैनल के लिए कर्मचारी आखिरकार कहां से आएंगे?

देहरादून के रायपुर इलाके के एक छोटे से घर से संचालित होने वाले वॉयस ऑफ नेशन चैनल को फिर से खड़ा करने की तैयारी ज़ोरों पर चल रही है। चैनल के मालिक मनीष वर्मा जेल से रिहा होते ही इस उधेड़ बुन में लग गए हैं। लेकिन इस चैनल का इस बार चल पाना बिल्कुल ही नामुमकिन सा लग रहा है। वजह है कि चैनल के लिए कर्मचारी आखिरकार कहां से आएंगे?

पिछले बार इस चैनल पर ताले लगने के साथ ही यहां काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी देहरादून से ही चलने वाले नेटवर्क 10 से जुड़ गए थे। हालात इस वक्त नेटवर्क10 में भी बेहद खराब है। कर्मचारियों की तनख्वाह सरकारी विज्ञापनों पर निर्भर है। ऐसे में वॉयस ऑफ नेशन को शायद नेटवर्क 10 की टीम तोड़ने का मौका मिल जाए। लेकिन वीओएन से जुड़ने से पहले कर्मचारियों के सामने खाई से निकलकर कुएं में गिरने जैसी स्थिती है। क्योंकि ये दोनों ही चैनल इस वक्त बैसाखियों के सहारे चल रहे है। वीओएन प्रबंधन इस वक्त खूब मशक्त कर रहा है कि किसी तरह से लोग उसके चैनल से जुड़ जाए लेकिन यहां आने को कोई राजी ही नहीं है।

पीसीआर, एडिटिंग, एडिटोरियल, रिपोर्टर से लेकर स्ट्रिंगर तक इस चैनल से जुड़ना पसंद नहीं कर रहे हैं। अब आप सुनिए ऐसे क्यों है। करीब 7 महीने चैनल चला। एक छोटे से मकान में ये पूरा चैनल चल रहा है। एक छोटे से कमरे में स्टूडियो बनाया गया है, स्टूडियो के बराबर ही छोटा सा पीसीआर है। इतना ही बड़ा एडिटोरियाल रूम है और उससे कुछ बड़ा एडिटिंग रूम है। पिछली बार एडिटोरियल में महज तीन लोग थे, पैकेजिंग में 2 लोग, एडिटिंग में 4 लोग, पीसीआर में 4 लोग, 3 एंकर और इसके अलावा कुछ सीनियर लोगों को मिलाकर कुल 17 से 18 लोगों का स्टाफ रहा होगा। यही वजह है कि इस चैनल में कर्मचारियों से 12-12 घंटे की शिफ्ट कराई जाती थी। ऐसे में अगर इस बार कोई इस चैनल से जुड़ने की सोच रहा हो तो कृपया अपने कदम पहले ही पीछे हटा लें क्योंकि 12 घंटे काम करने के बाद आपका जूस निकल जाएगा।

इस चैनल के डूबने की सबसे बड़ी वजह चैनल की कोई पॉलिसी नहीं होना है। ना सिर्फ चैनल मालिक अपना निजी स्वार्थ पूरा करने के लिए वीओएन को चला रहे हैं बल्कि ऐसी ही कुछ स्थिति चैनल प्रबंधन के लोगों की भी है। चैनल मालिक ने जिन लोगों को चैनल चलाने की जिम्मेदारी दी है वो अपना निजी स्वार्थ पूरा करने के लिए अपने मुताबिक खबरें चलवाते हैं। जो कि इस चैनल के डूबने की एक बड़ी वजह रही है। इस चैनल की एक खासियत और सुनिए। यहां किसी भी कर्मचारी को नौकरी से निकालने से पहले नोटिस नहीं दिया जाता है। चैनल मालिक मनीष वर्मा को जब भी किसी को नौकरी से निकालना होता है वो गेट पर फोन कर सिक्योरिटी गार्ड को पहले ही कह देते हैं इस नाम के आदमी को गेट के अंदर दाखिल नहीं होने देना और कह देना उनकी सेवाएं समाप्त हो चुकी है। इस चैनल की एक खास बात ये है कि यहां रिपोर्टरों को अपने पैसों से केबल पर खुद ही चैनल खुलवाना पड़ता है। ये बात चैनल के सीनियर लोग स्ट्रिंगर से पहले ही तय कर लेते हैं, साथ ही विज्ञापन का प्रेशर अलग से हैडेक है। भला इन हालात में क्या कोई इस चैनल से जुड़ना चाहेगा।

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