फिर तो अरविंद केजरीवाल सोनिया गांधी से ज्यादा बड़े कांग्रेसी हैं!

टीम अन्ना आज देहरादून आई। लार्ड वेंकेटेश्वर वेडिंग प्वांइट में कार्यक्रम हुआ। चार-पांच सौ की इस भीड़ में स्कूली बच्चे लाए गय थे। कुछ स्कूलों के प्रबंधकों के सौजन्य से। अरविंद केजरीवाल बोले कि कुंभ घोटाला समेत उत्तराखंड में हुए सारे घोटाले करने वालों को हराया जाना चाहिए। साथ में वह उत्तराखंड के लोकपाल विधेयक की तारीफ करने से नहीं चूके। उन्होंने कहा कि इस लोकपाल को ज्यों का त्यों देश में लागू कर दिया जाना चाहिए। यदि उनकी बात मान ली जाय तो प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों और सांसदों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों पर तब तक सुनवाई नहीं हो सकती जब तक लोकपाल की संपूर्ण पीठ एकमत होकर इसकी मंजूरी न दे दे।

केंद्र सरकार के सचिव और विभागाध्यक्ष स्तर के बड़े अफसरों के भ्रष्टाचार के मामलों पर तब तक विचार नहीं किया जा सकता जब तक लोकपाल की पीठ का बहुमत इसकी इजाजत न दे दे। यदि केजरीवाल ऐसा ही विधेयक चाहते हैं तो मुझे नहीं लगता कि उन्हे केंद्र सरकार के लोकपाल बिल से कोई समस्या होनी चाहिए। क्योंकि वह इससे बेहतर बिल है। अब उत्तराखंड के लोग क्या करें? यदि घोटाले वालों को हरायें तो भाजपा में जिताने के लिए कोई बचेगा ही नहीं। यदि लोकायुक्त बिल के लिए जितवायें तो फिर जनरल खंडूड़ी के अलावा किसी और को वोट नहीं दिया जा सकता?

क्या केजरीवाल यही चाहते हैं कि सिर्फ जनरल खंडूड़ी को ही जितायें? यदि ऐसा है तो मुझे लगता है कि वह सोनिया गांधी से भी बड़े कांग्रेसी हैं। टीम अन्ना की समझ में अभी तक यह नहीं आया कि जितनी ज्यादा चालाकी करेंगे उतने ही फंसते जायेंगे। राजनीति बेहद जटिल खेल है इसमें या तो राजनीतिक दल बनाकर मैदान में उतरना चाहिए या फिर एक ही डंडे से सारे दलों को हांकना चाहिए। लेकिन टीम अन्ना भाजपा को सपोर्ट भी करना चाहती है और उसके भ्रष्टाचार से भी दूरी रखना चाहती है। यह नटकला संभव नहीं है।

टीम अन्ना का देहरादून दौरा जूते की वजह से चर्चा में ज्यादा रहा। जूता फेंकना एक फैशन होता जा रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतांत्रिक मर्यादाओं की सीमाओं के भीतर रहकर विरोध करने के बजाय इस तरह की हरकतों बढ़ जाने से आपसी टकराव होंगे, मारपीट होगी और यह हमें अराजकता की ओर ले जाएगा। टीम अन्ना चूंकि राजनीति में उतर आई है इसलिए उसे भी वही सब झेलने की आदत डालनी होगी जिन्हे झेलते हुए हमारे नेता बेशर्म हो जाते हैं।

उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार राजन टोडरिया के फेसबुक वॉल से साभार

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